
गुजरात में शराबबंदी, फिर भी लोग गटक गए 60,000 लीटर दारू, सरकार का खुलासा
गुजरात में लंबे समय से शराबबंदी लागू होने के बावजूद राज्य में शराब की खपत से जुड़ा चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। सरकार की ओर से विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्रतिबंध के बावजूद राज्य में बड़ी मात्रा में शराब की खपत और अवैध शराब कारोबार से जुड़ी गतिविधियां सामने आती रही हैं। रिपोर्ट में करीब 60 हजार लीटर शराब की खपत का आंकड़ा चर्चा में है, जिसने राज्य में लागू शराबबंदी की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुजरात में शराब की बिक्री और सेवन पर सामान्य तौर पर प्रतिबंध है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में परमिट व्यवस्था के तहत शराब रखने या सेवन की अनुमति दी जाती है। इसके अलावा, राज्य में अवैध रूप से शराब की तस्करी और बिक्री रोकने के लिए पुलिस तथा प्रशासन लगातार कार्रवाई करता है। इसके बावजूद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि शराबबंदी को लागू करना सरकार के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
शराबबंदी के बावजूद कैसे पहुंच रही है शराब?
शराबबंदी वाले राज्य में शराब की उपलब्धता का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर अवैध तस्करी और चोरी-छिपे होने वाली बिक्री से जुड़ा है। पड़ोसी राज्यों से शराब गुजरात में पहुंचाए जाने की शिकायतें और मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। पुलिस की ओर से अवैध शराब जब्त करने और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
हालांकि, सरकार के सामने चुनौती सिर्फ शराब की तस्करी रोकने की नहीं है, बल्कि ऐसे नेटवर्क को खत्म करने की भी है जो प्रतिबंध के बावजूद शराब की मांग को पूरा करने की कोशिश करते हैं।
आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के बाद शराबबंदी की नीति को लेकर बहस तेज हो सकती है। एक तरफ सरकार शराबबंदी को सामाजिक हित से जुड़ी नीति के रूप में लागू करती है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में शराब की खपत और जब्ती के आंकड़े यह सवाल उठाते हैं कि प्रतिबंध को जमीन पर पूरी तरह लागू करने में आखिर कहां कमी रह जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सिर्फ कानून बनाने से शराब की उपलब्धता पूरी तरह खत्म नहीं होती। इसके लिए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी, अवैध सप्लाई नेटवर्क पर कार्रवाई और स्थानीय स्तर पर enforcement को मजबूत करना जरूरी होता है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
गुजरात सरकार के सामने एक तरफ शराबबंदी को प्रभावी तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ अवैध शराब कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई करने की चुनौती भी है। बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी यह बताती है कि अवैध सप्लाई को रोकने के लिए एजेंसियों को लगातार सक्रिय रहना पड़ता है।
कुल मिलाकर, गुजरात में शराबबंदी के बावजूद सामने आया 60 हजार लीटर शराब की खपत से जुड़ा आंकड़ा इस नीति के क्रियान्वयन पर चर्चा को फिर से सामने ले आया है। अब सवाल यही है कि शराबबंदी वाले राज्य में इतनी बड़ी मात्रा में शराब की पहुंच और खपत को रोकने के लिए सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

