‘अखिलेश श्रीकृष्ण के वंशज नहीं, कंसवंशी’— सुदामा वाले बयान पर ओपी राजभर का तीखा हमला

‘अखिलेश श्रीकृष्ण के वंशज नहीं, कंसवंशी’— सुदामा वाले बयान पर ओपी राजभर का तीखा हमला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी एक बार फिर तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर (ओपी राजभर) ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “अखिलेश यादव श्रीकृष्ण के वंशज नहीं, बल्कि कंसवंशी हैं।” उनका यह बयान सपा प्रमुख के हालिया सुदामा संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।

ओपी राजभर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि समाजवादी पार्टी केवल जनता को गुमराह करने की राजनीति करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि उनके कार्य और विचार भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों से मेल नहीं खाते। राजभर ने कहा कि जो व्यक्ति समाज में भ्रम फैलाने का काम करे, वह श्रीकृष्ण के आदर्शों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।

उन्होंने आगे कहा कि “भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म और न्याय की स्थापना के लिए काम किया था, जबकि अखिलेश यादव की राजनीति केवल सत्ता हासिल करने तक सीमित है। इसलिए उन्हें श्रीकृष्ण का वंशज कहना उचित नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक आचरण को देखते हुए वे कंसवंशी लगते हैं।”

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा का उदाहरण देते हुए सामाजिक समानता और मित्रता पर टिप्पणी की थी। उनके बयान के बाद भाजपा और एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं ने इसे लेकर लगातार पलटवार किया है।

ओपी राजभर ने कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी को घेरा। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं और जनता विपक्ष के आरोपों पर विश्वास नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में जनता एक बार फिर एनडीए के पक्ष में फैसला करेगी।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से ओपी राजभर के इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक प्रतीकों को लेकर हो रही बयानबाज़ी आने वाले चुनावों के मद्देनज़र राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकती है। विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे अपने राजनीतिक प्रतिरोध का हिस्सा मान रहा है।

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