
‘A फॉर एप्पल नहीं, अमरूद पढ़िए तभी होगा देश का विकास’, अनिरुद्धाचार्य के बयान पर छिड़ी बहस
नई दिल्ली: प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि बच्चों को “A for Apple” की जगह “A for Amrood (अमरूद)” पढ़ाया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि भारत के बच्चों को विदेशी उदाहरणों के बजाय स्थानीय फलों, संस्कृति और भारतीय परिवेश से जोड़कर शिक्षा दी जानी चाहिए। इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हो गई है।
अनिरुद्धाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां के बच्चों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए जो उनके आसपास के वातावरण और भारतीय जीवनशैली से जुड़ी हो। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे शुरुआत से ही भारतीय फलों, पेड़ों और स्थानीय चीजों के बारे में सीखेंगे तो उनमें अपनी संस्कृति और देश के प्रति जुड़ाव मजबूत होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “A for Apple नहीं, A for Amrood पढ़िए, तभी देश का विकास होगा।”
उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कुछ लोगों ने इसे भारतीय भाषाओं और स्थानीय शिक्षा को बढ़ावा देने की सकारात्मक पहल बताया। उनका कहना है कि शुरुआती शिक्षा में स्थानीय संदर्भों का इस्तेमाल बच्चों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने इस बयान की आलोचना भी की। आलोचकों का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को वैश्विक ज्ञान से जोड़ना है और अंग्रेजी वर्णमाला में “Apple” का उदाहरण लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। उनके मुताबिक, किसी एक शब्द को बदलने से शिक्षा व्यवस्था या देश का विकास तय नहीं होता।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक शिक्षा में स्थानीय और वैश्विक दोनों तरह के उदाहरणों का संतुलित उपयोग किया जा सकता है। उनका मानना है कि बच्चों को अपनी भाषा, संस्कृति और परिवेश से जोड़ना महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित ज्ञान और भाषा से परिचित कराना भी उतना ही आवश्यक है।
फिलहाल अनिरुद्धाचार्य के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। कुछ लोग इसे भारतीयता को बढ़ावा देने वाला विचार बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे अनावश्यक विवाद का विषय मान रहे हैं। इस बयान ने एक बार फिर शिक्षा, भाषा और भारतीय संस्कृति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

