
हंगामे के बीच सीतारमण ने पास करवा लिया बड़ा बिल, सिर्फ 3 मिनट में कैसे हो गया पूरा खेल?
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा देखने को मिला। सदन में लगातार शोर-शराबे और विपक्ष के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश एक महत्वपूर्ण वित्तीय विधेयक को बेहद कम समय में पारित करा लिया। बताया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया महज तीन मिनट के भीतर पूरी हो गई, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी करने लगे। सदन में लगातार हंगामा जारी रहा, जिसके कारण सामान्य चर्चा नहीं हो सकी। इसी बीच सरकार ने कार्यसूची में शामिल वित्तीय विधेयक को पेश किया। सदन में शोर-शराबे के बावजूद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
विपक्ष का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर न तो पर्याप्त चर्चा कराई गई और न ही सांसदों को विस्तार से अपनी बात रखने का अवसर मिला। विपक्षी नेताओं ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और किसी भी अहम कानून को जल्दबाजी में पारित करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि सरकार लगातार बहुमत के दम पर विधेयकों को बिना विस्तृत बहस के पारित करा रही है।
वहीं सरकार का पक्ष है कि विधेयक पहले से कार्यसूची में शामिल था और संसदीय नियमों के तहत उसे पारित किया गया। सरकार का कहना है कि विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई, लेकिन जरूरी विधायी कार्यों को पूरा करना भी संसद की जिम्मेदारी है। इसलिए नियमों के अनुसार विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में हंगामे के बीच विधेयकों के पारित होने का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। एक ओर सरकार इसे संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बताती है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक बहस और जवाबदेही की भावना के विपरीत मानता है।
अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की बात कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि संसद की कार्यवाही बाधित करने की जिम्मेदारी विपक्ष की है और विकास से जुड़े विधायी कार्य किसी भी स्थिति में नहीं रुक सकते।
आने वाले दिनों में इस विधेयक और इसे पारित करने की प्रक्रिया को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

