24 देशों से समझौता और 11 से बातचीत… मोदी सरकार में क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

24 देशों से समझौता और 11 से बातचीत… मोदी सरकार में क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

ऊर्जा सुरक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों की बढ़ती मांग के बीच भारत क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीति को लगातार मजबूत कर रहा है। सरकार के अनुसार, भारत ने अब तक 24 देशों के साथ सहयोग और समझौते किए हैं, जबकि 11 अन्य देशों के साथ इस क्षेत्र में साझेदारी को लेकर बातचीत जारी है।

क्रिटिकल मिनरल्स में लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट, तांबा और दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements) जैसे खनिज शामिल हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सोलर पैनल, विंड टर्बाइन, रक्षा उपकरणों और सेमीकंडक्टर निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

भारत लंबे समय से इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। ऐसे में सरकार की रणनीति केवल आयात बढ़ाने की नहीं, बल्कि मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी, विदेशों में खनन परियोजनाओं में निवेश और घरेलू खोज एवं उत्पादन को बढ़ावा देने की भी है।

सरकार ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान, नई खदानों की नीलामी, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने जैसे कई कदम उठाए हैं। इसके साथ ही भारत ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, चिली, अफ्रीका और अन्य खनिज समृद्ध देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के साथ क्रिटिकल मिनरल्स की मांग कई गुना बढ़ेगी। ऐसे में समय रहते इन संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

इसके अलावा, क्रिटिकल मिनरल्स की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला भारत के ‘मेक इन इंडिया’, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, बैटरी निर्माण, सेमीकंडक्टर उद्योग और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती दे सकती है। यही वजह है कि सरकार इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और घरेलू उत्पादन, दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत अपनी वैश्विक साझेदारियों और घरेलू खनन क्षमता का प्रभावी ढंग से विस्तार करता है, तो भविष्य में वह न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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