
151वीं जयंती पर खास: क्यों दुनिया आज भी जिम कॉर्बेट को करती है सलाम? 300 से ज्यादा बाघों की धरती से जुड़ी है उनकी विरासत
प्रसिद्ध शिकारी, प्रकृतिविद और लेखक जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती पर उन्हें दुनिया भर में याद किया जा रहा है। कभी आदमखोर बाघों और तेंदुओं से लोगों की रक्षा करने वाले जिम कॉर्बेट ने बाद के वर्षों में वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। उनके नाम पर उत्तराखंड में स्थित जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क आज भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व में गिना जाता है।
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क आज जैव विविधता और बाघ संरक्षण का बड़ा केंद्र है। यहां 300 से अधिक बाघों की मौजूदगी वाला कॉर्बेट टाइगर लैंडस्केप वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक यहां सफारी का रोमांच लेने और बाघों को प्राकृतिक आवास में देखने पहुंचते हैं।
जिम कॉर्बेट की विरासत केवल एक शिकारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की ऐसी सोच दी जिसने पूरी दुनिया को प्रेरित किया। उनकी लिखी किताबें और संरक्षण के प्रति उनका दृष्टिकोण आज भी वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल माना जाता है। उनकी जयंती हमें जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के महत्व की याद दिलाती है।

