
सुल्तानपुर तहसील में लेखपालों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, बिना “चढ़ावा” नहीं हो रहा कोई काम
किसकी शह पर इनके कमरों में मौजूद रहते हैं, प्राइवेट मुंशी
सुल्तानपुर जनपद की तहसीलों, विशेषकर सदर तहसील में लेखपालों की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आम जनता का आरोप है कि बिना “सुविधा शुल्क” या “चढ़ावा” दिए कोई भी राजस्व संबंधी कार्य कराना लगभग असंभव हो गया है। चाहे खतौनी की नकल निकलवानी हो, घरौनी योजना के तहत कागजात बनवाने हों या अन्य भूमि संबंधित कार्य—हर जगह रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पहले भी हो चुकी हैं कई कार्रवाई और खुलासे
जनपद में लेखपालों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पहले भी उजागर होते रहे हैं। अक्टूबर 2022 में एंटी करप्शन टीम ने सदर तहसील के एक लेखपाल को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। वहीं जून 2022 में घरौनी योजना में फर्जीवाड़े का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें लेखपाल द्वारा खुलेआम पैसों की मांग की जा रही थी।
इसके अलावा वर्ष 2025 में लेखपाल प्रवीण कुमार सिंह पर पट्टा दिलाने के नाम पर दो भाइयों से करीब 2 लाख रुपये ठगने का आरोप लगा था। हाल ही में एक और मामला सामने आया, जिसमें लेखपाल पर जमीन के विवाद में पक्षकारों को धमकाने का आरोप लगा और उसका ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
तहसील में ‘प्राइवेट मुंशी’ चला रहे कामकाज
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तहसील के अंदर लेखपालों के कमरों में उनके द्वारा रखे गए तथाकथित “प्राइवेट मुंशी” ही अधिकांश काम निपटाते नजर आते हैं। सूत्रों के अनुसार, ये मुंशी ही आम जनता से सीधे पैसे की मांग करते हैं और पूरा कामकाज संभालते हैं, जबकि सरकारी कर्मचारी की भूमिका गौण होती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उपजिलाधिकारी या तहसीलदार द्वारा अचानक निरीक्षण किया जाए, तो लगभग हर कमरे में ऐसे प्राइवेट लोग काम करते हुए मिल जाएंगे।
प्रशासन देता रहा आश्वासन, लेकिन हालात जस के तस
मामले सामने आने और वीडियो/ऑडियो वायरल होने के बाद प्रशासन द्वारा जांच और कार्रवाई के आश्वासन जरूर दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता। यही कारण है कि तहसील परिसर में अक्सर तनावपूर्ण माहौल बना रहता है और आम आदमी खुद को ठगा हुआ महसूस करता है।
जनता की मांग—हो सख्त कार्रवाई
भ्रष्टाचार से त्रस्त लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लेखपालों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अचानक निरीक्षण किए जाएं और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके और सरकारी व्यवस्था में विश्वास बहाल हो सके।
किशन पाठक
सुल्तानपुर

