समंदर किनारे बसे मुंबई में बारिश का पानी क्यों नहीं निकलता? बाढ़ का असली कारण क्या है?

समंदर किनारे बसे मुंबई में बारिश का पानी क्यों नहीं निकलता? बाढ़ का असली कारण क्या है?

मुंबई: हर साल मानसून आते ही देश की आर्थिक राजधानी Mumbai> की कई सड़कें और निचले इलाके जलमग्न हो जाते हैं। अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि चारों तरफ समुद्र से घिरे शहर में आखिर बारिश का पानी इतनी जल्दी क्यों नहीं निकल पाता? इसकी वजह सिर्फ भारी बारिश नहीं, बल्कि कई भौगोलिक और शहरी कारण हैं।

सबसे पहला कारण है हाई टाइड (ज्वार)। मुंबई का वर्षा जल आखिरकार समुद्र में ही जाता है, लेकिन जब समुद्र में ऊंचा ज्वार आता है तो समुद्र का जलस्तर बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में शहर का ड्रेनेज सिस्टम पानी को समुद्र में तेजी से नहीं छोड़ पाता, जिससे पानी सड़कों और निचले इलाकों में भरने लगता है।

दूसरा बड़ा कारण है अत्यधिक और कम समय में होने वाली भारी बारिश। मानसून के दौरान कई बार कुछ ही घंटों में इतनी अधिक बारिश हो जाती है कि नालों और जल निकासी व्यवस्था की क्षमता कम पड़ जाती है। नतीजतन, पानी सड़कों पर जमा होने लगता है।

तीसरा कारण है तेजी से हुआ शहरीकरण। बीते वर्षों में कंक्रीट की सड़कें, इमारतें और पक्के निर्माण तेजी से बढ़े हैं। इससे जमीन में पानी के प्राकृतिक रूप से समाने की क्षमता कम हो गई है और अधिकांश वर्षा जल सीधे सड़कों पर बहने लगता है।

इसके अलावा नालों में गाद और कचरा जमा होना, अवैध अतिक्रमण, पुराने ड्रेनेज नेटवर्क और कुछ प्राकृतिक जल निकासी मार्गों के संकुचित होने से भी जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है। कई इलाकों में ड्रेनेज सिस्टम दशकों पुराना है, जिसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार लगातार उन्नत करने की आवश्यकता बताई जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा (Extreme Rainfall Events) की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने से शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर अतिरिक्त दबाव में आ जाता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या का समाधान केवल बड़े नाले बनाने से नहीं होगा। इसके लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, नियमित नालों की सफाई, मैंग्रोव और प्राकृतिक जल निकासी क्षेत्रों का संरक्षण, बेहतर शहरी नियोजन और वर्षा जल प्रबंधन पर दीर्घकालिक निवेश की जरूरत है।

मुंबई में हर साल होने वाला जलभराव किसी एक कारण का परिणाम नहीं है, बल्कि भौगोलिक स्थिति, समुद्री ज्वार, अत्यधिक वर्षा, तेज शहरीकरण और ड्रेनेज संबंधी चुनौतियों का संयुक्त प्रभाव है। इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम किए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं माना जाता।

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