
वट सावित्री पूजा से पहले पत्नी पीड़ित पुरुषों ने की पीपल की उल्टी परिक्रमा, सरकार से उठाई ये अनोखी मांग
वट सावित्री व्रत से पहले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला। खुद को ‘पत्नी पीड़ित’ बताने वाले पुरुषों के एक समूह ने पीपल के पेड़ की उल्टी परिक्रमा कर विरोध जताया और पुरुषों के अधिकारों को लेकर सरकार से विशेष कानून बनाने की मांग की। इस अनोखे प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
प्रदर्शन में शामिल पुरुषों का कहना था कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए कई कानून मौजूद हैं, लेकिन वैवाहिक विवादों में पुरुषों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता। उनका आरोप था कि कई मामलों में दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा जैसे कानूनों का दुरुपयोग होता है, जिससे निर्दोष पुरुष और उनके परिवार कानूनी परेशानियों का सामना करते हैं। इसी मुद्दे को उठाने के लिए उन्होंने प्रतीकात्मक तरीके से पीपल के पेड़ की उल्टी परिक्रमा की।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार पुरुष आयोग का गठन करे, वैवाहिक विवादों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए और कथित झूठे मामलों में फंसने वाले पुरुषों के लिए भी प्रभावी कानूनी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना था कि कानून का उद्देश्य किसी एक पक्ष का नहीं, बल्कि न्याय का होना चाहिए।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारेबाजी भी की। उन्होंने कहा कि वट सावित्री व्रत में जहां महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूजा करती हैं, वहीं वे इस अवसर पर अपने अधिकारों और न्याय की मांग को प्रतीकात्मक रूप से सामने रख रहे हैं। उनका कहना था कि यह किसी धार्मिक परंपरा का विरोध नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं की ओर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है।
हालांकि, इस प्रदर्शन को लेकर सामाजिक संगठनों और लोगों की अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ लोगों ने इसे पुरुषों की समस्याओं को सामने लाने का लोकतांत्रिक तरीका बताया, जबकि कुछ ने धार्मिक परंपराओं से जोड़कर ऐसे प्रदर्शन पर आपत्ति भी जताई। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
फिलहाल, प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। आयोजकों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में वे देशभर में इसी तरह के जागरूकता अभियान और प्रदर्शन आयोजित करेंगे। वहीं, प्रशासन की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

