
लखनऊ में धर्मांतरण के दावों के बीच गिरिजाघरों की जमीनों की जांच की मांग, CM तक पहुंचा मामला
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में कथित धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपकर लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्थित चर्चों और अन्य धार्मिक स्थलों की जमीन तथा उनके भू-उपयोग की जांच कराने की मांग की है।
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी का दावा है कि प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रशासन की अनुमति के बिना चर्च और अन्य धार्मिक स्थल बनाए जा रहे हैं। संगठन ने सरकार से ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जमीन और भू-उपयोग की जांच की मांग
संगठन की ओर से मुख्यमंत्री तक पहुंचाए गए ज्ञापन में चर्चों से जुड़ी जमीन के स्वामित्व, इस्तेमाल और भू-उपयोग की जांच की मांग प्रमुखता से रखी गई है। मांग की गई है कि यदि किसी धार्मिक स्थल का निर्माण नियमों के विपरीत हुआ है तो प्रशासन उसके दस्तावेजों और निर्माण की वैधता की जांच करे।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब लखनऊ में कथित धर्मांतरण से जुड़े कुछ मामले चर्चा में हैं। हाल ही में मोहनलालगंज क्षेत्र में एक घर में कथित तौर पर चर्च चलाने और लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रलोभन देने के आरोपों का मामला सामने आया था। पुलिस ने मामले में कार्रवाई की थी।
धर्मांतरण के आरोपों की भी जांच
हिंदू महासभा ने धर्मांतरण के आरोपों को लेकर भी सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को दबाव, धोखे या प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा है तो ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, किसी व्यक्ति या संस्था पर धर्मांतरण जैसे गंभीर आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता, जब तक जांच एजेंसियों या अदालत की प्रक्रिया से उनकी पुष्टि न हो जाए।
CM तक पहुंचा मामला, अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
ज्ञापन मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद अब निगाहें प्रशासन की संभावित कार्रवाई पर हैं। यदि सरकार या स्थानीय प्रशासन जांच के आदेश देता है तो संबंधित जमीनों के रिकॉर्ड, स्वामित्व, भूमि उपयोग और निर्माण की अनुमति जैसे पहलुओं की जांच की जा सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने सभी चर्चों की जमीनों की व्यापक जांच के संबंध में कोई अंतिम आदेश जारी किया है। इसलिए ‘जांच होगी’ की जगह फिलहाल इसे ‘जांच की मांग’ के तौर पर देखना अधिक सही होगा।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश में पहले भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। लखनऊ में ताजा घटनाक्रम ने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। सरकार के सामने एक ओर कानून के तहत धर्मांतरण से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की चुनौती है, तो दूसरी ओर धार्मिक संस्थानों और उनकी संपत्तियों से जुड़े मामलों में नियमों के पालन की जांच का सवाल है।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और जिला प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाया जाता है और क्या चर्चों की जमीन तथा भू-उपयोग को लेकर कोई औपचारिक जांच शुरू होती है।

