
योगिनी एकादशी 2026: एकादशी पर दो दिन का भ्रम क्यों? जानिए किस दिन रखें व्रत और क्या है उदया तिथि का नियम
योगिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी व्रतों में से एक मानी जाती है। वर्ष 2026 में एकादशी तिथि दो अलग-अलग दिनों में पड़ने के कारण श्रद्धालुओं के बीच यह भ्रम बना हुआ है कि व्रत किस दिन रखा जाए। दरअसल, पंचांगों में तिथि के आरंभ और समाप्ति के समय के आधार पर अलग-अलग मत सामने आते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत रखने के लिए उदया तिथि का विशेष महत्व होता है। उदया तिथि का अर्थ है वह तिथि जो सूर्योदय के समय विद्यमान हो। सामान्यतः गृहस्थ लोगों के लिए उसी दिन एकादशी व्रत रखने की सलाह दी जाती है, जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि हो। वहीं, कुछ विशेष परिस्थितियों में वैष्णव परंपरा के अनुसार व्रत की तिथि अलग भी हो सकती है।
ऐसे में श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग या विद्वान आचार्य की सलाह के अनुसार व्रत का संकल्प लेना चाहिए। सही तिथि पर श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया योगिनी एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

