भारत ऑस्ट्रेलिया से मिले यूरेनियम का कहां करेगा इस्तेमाल? जानिए दुनिया के सबसे बड़े भंडार वाले देश की ताकत

भारत ऑस्ट्रेलिया से मिले यूरेनियम का कहां करेगा इस्तेमाल? जानिए दुनिया के सबसे बड़े भंडार वाले देश की ताकत

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम आपूर्ति को लेकर अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को शांतिपूर्ण (सिविल) परमाणु कार्यक्रमों के लिए यूरेनियम उपलब्ध कराएगा। इसका उपयोग मुख्य रूप से परमाणु बिजलीघरों में बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। भारत ने वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता में बड़ा विस्तार करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए लंबे समय तक यूरेनियम की स्थिर आपूर्ति आवश्यक मानी जा रही है।

भारत इस यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु रिएक्टरों में बिजली उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए करेगा। इससे कोयले पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और उद्योगों, डेटा सेंटरों तथा भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत यूरेनियम का उपयोग केवल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप नागरिक परमाणु कार्यक्रमों में ही किया जाएगा।

अगर ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो उसके पास दुनिया के सबसे बड़े ज्ञात यूरेनियम भंडार हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार, वैश्विक ज्ञात यूरेनियम संसाधनों का लगभग 28–30% हिस्सा ऑस्ट्रेलिया में मौजूद है। यही वजह है कि वह दुनिया के प्रमुख यूरेनियम निर्यातक देशों में शामिल है और भारत के लिए यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा तथा दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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