
बिहार की राजनीति में ‘भूमिहार’ बनाम ‘भूमिहार ब्राह्मण’ विवाद, नाम को लेकर क्यों मचा है सियासी घमासान?
बिहार की राजनीति में इन दिनों ‘भूमिहार’ और ‘भूमिहार ब्राह्मण’ नाम को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाते हुए मांग की गई कि सरकारी जाति प्रमाणपत्रों और आधिकारिक अभिलेखों में केवल ‘भूमिहार’ के बजाय ‘भूमिहार ब्राह्मण’ नाम दर्ज किया जाए। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल नाम बदलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इस मांग के समर्थकों का कहना है कि 1931 की जनगणना, पुराने राजस्व अभिलेखों और कई ऐतिहासिक दस्तावेजों में ‘भूमिहार ब्राह्मण’ शब्द का उल्लेख मिलता है। उनका तर्क है कि वर्तमान रिकॉर्ड में केवल ‘भूमिहार’ लिखे जाने से ऐतिहासिक पहचान और आधिकारिक दस्तावेजों के बीच असंगति पैदा होती है। वहीं सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के अनुसार जाति प्रमाणपत्रों में ‘भूमिहार’ नाम ही दर्ज किया जाता है और इसे बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
इस मुद्दे ने बिहार की सियासत को भी गर्मा दिया है। विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसे पहचान और प्रतिनिधित्व से जुड़ा विषय बताया है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का मामला बता रही है। आने वाले समय में यह बहस राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर और तेज हो सकती है।

