पश्चिम बंगाल में TMC पर टूट का खतरा! दलबदल कानून से बच पाएंगे बागी? स्पीकर की भूमिका पर टिकी नजरें

पश्चिम बंगाल में TMC पर टूट का खतरा! दलबदल कानून से बच पाएंगे बागी? स्पीकर की भूमिका पर टिकी नजरें

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर संभावित बगावत और पार्टी टूट की चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के कई विधायक नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं और एक अलग गुट बनाने की कोशिशों की खबरें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बागी खेमे ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से भी संपर्क किया है, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) को लेकर उठ रहा है। संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत यदि कोई विधायक स्वेच्छा से पार्टी छोड़ता है या पार्टी के निर्देशों के खिलाफ कार्य करता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। हालांकि यदि किसी दल के विधायकों का बड़ा समूह अलग होकर वैधानिक मान्यता पाने का दावा करता है, तो कानूनी और संवैधानिक स्थिति काफी जटिल हो जाती है। यही कारण है कि बागी विधायकों की वास्तविक संख्या और उनके कदमों पर सबकी नजर बनी हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दलबदल से जुड़े मामलों में प्रारंभिक फैसला स्पीकर ही लेते हैं कि किसी विधायक या समूह पर दलबदल कानून लागू होगा या नहीं। यदि बागी गुट औपचारिक दावा पेश करता है, तो स्पीकर को दस्तावेजों, समर्थन संख्या और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्पीकर का रुख और कानूनी प्रक्रिया ही तय करेगी कि यह विवाद महज राजनीतिक दबाव की रणनीति साबित होता है या फिर TMC के भीतर वास्तविक टूट का रूप लेता है।

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