नेपाल बाढ़ में 291 विदेशी नागरिक लापता, 105 भारतीय शामिल, 7 की मौत; कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी संकट

नेपाल बाढ़ में 291 विदेशी नागरिक लापता, 105 भारतीय शामिल, 7 की मौत; कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी संकट

नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। रसुवा जिले के रसुवागढ़ी इलाके में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें भारत समेत कई देशों के नागरिक शामिल हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक करीब 291 विदेशी नागरिकों के लापता होने की बात सामने आई है, जिनमें 105 भारतीय नागरिक बताए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 7 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि कई लोग घायल और लापता हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्री भी फंसे

बताया जा रहा है कि चीन के तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री नेपाल के रास्ते आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान रसुवागढ़ी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने हालात बिगाड़ दिए। करीब 400 तीर्थयात्रियों के संपर्क से बाहर होने की सूचना के बाद उनके परिजनों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

रसुवागढ़ी नेपाल-चीन सीमा के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है और कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्ग है। बाढ़ के कारण इस इलाके में सड़क संपर्क और दूसरी जरूरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है, जिससे राहत और बचाव अभियान चलाने में भी मुश्किलें आ रही हैं।

नेपाल-चीन सीमा के गांवों में तबाही

अचानक आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा जिले के सीमा से जुड़े गांवों में देखने को मिला है। तेज बहाव के कारण कई इलाकों में पानी भर गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। बाढ़ के पानी ने सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।

स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का जायजा ले रही हैं। लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।

त्रिशूली नदी बेसिन में भी बढ़ा खतरा

बाढ़ के बाद नेपाल पुलिस ने त्रिशूली नदी बेसिन से जुड़े कई जिलों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा समेत आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों से अगले आदेश तक सतर्क रहने और नदी तथा निचले इलाकों से दूर सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा गया है।

प्रशासन को आशंका है कि लगातार बारिश और नदी के जलस्तर में बदलाव के कारण हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में लोगों से नदी किनारे जाने और जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने से बचने की अपील की गई है।

भारतीय नागरिकों की स्थिति पर नजर

बाढ़ में 105 भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर के बाद भारत में भी चिंता बढ़ गई है। खास तौर पर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय तीर्थयात्रियों के परिवार उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित हैं।

भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए संबंधित एजेंसियों के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में संचार और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण सभी लोगों की तत्काल जानकारी हासिल करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें

बाढ़ के कारण कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त होने और संपर्क मार्ग बाधित होने से राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता फंसे हुए लोगों तक पहुंचना, लापता लोगों की तलाश करना और प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।

स्थानीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासनिक टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

मानसून में नेपाल के कई हिस्से संवेदनशील

नेपाल में मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। पहाड़ी इलाकों में अचानक जलस्तर बढ़ने से स्थिति तेजी से बदल सकती है। ऐसे में नदी घाटियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।

रसुवा में हुई इस घटना ने एक बार फिर नेपाल के पहाड़ी और सीमा क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की चुनौती को सामने ला दिया है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान लापता लोगों की तलाश, प्रभावित नागरिकों की मदद और जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है।

नोट: लापता और मृतकों की संख्या शुरुआती रिपोर्टों पर आधारित है। राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ आंकड़ों में बदलाव संभव है।

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