देश के सबसे पुराने चिप प्लांट के आधुनिकीकरण पर सस्पेंस! पार्टनर्स तैयार, फिर भी क्यों अटका रिवैंप?
भारत के सबसे पुराने सेमीकंडक्टर (चिप) निर्माण संयंत्र के आधुनिकीकरण को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है, लेकिन संभावित साझेदारों की रुचि के बावजूद परियोजना अभी तक अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सकी है। सरकार देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, फिर भी इस महत्वपूर्ण प्लांट के रिवैंप को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे भारत की चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने की योजनाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक, परियोजना से जुड़े तकनीकी उन्नयन, निवेश मॉडल, व्यावसायिक व्यवहार्यता, वैश्विक तकनीकी साझेदारों के चयन और विभिन्न नियामकीय प्रक्रियाओं जैसे कई पहलुओं पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। हालांकि कई संभावित पार्टनर्स इस परियोजना में रुचि दिखा चुके हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर अंतिम समझौते और कार्यान्वयन की समय-सीमा स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसी कारण परियोजना की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस चिप प्लांट का आधुनिकीकरण समय पर पूरा होता है, तो इससे भारत की सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण तथा हाई-टेक उद्योगों को भी बड़ा समर्थन मिलेगा। फिलहाल उद्योग जगत की नजर सरकार और संभावित साझेदारों के अगले फैसले पर टिकी हुई है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना की दिशा तय होगी।

