
देवास फैक्ट्री ब्लास्ट की दर्दनाक कहानी: 400 रुपये दिहाड़ी पर मजदूरों से कराया जा रहा था खतरनाक काम, 5 की मौत से हड़कंप
Dewas में हुए फैक्ट्री ब्लास्ट ने एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री में काम करने वाले कई मजदूर बेहद कम दिहाड़ी पर खतरनाक परिस्थितियों में काम करने को मजबूर थे। बताया जा रहा है कि मजदूरों को करीब 400 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बारूद और विस्फोटक सामग्री के बीच काम कराया जा रहा था। हादसा इतना भयानक था कि फैक्ट्री में अचानक हुए जोरदार विस्फोट के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार विस्फोट इतना तेज था कि कई किलोमीटर दूर तक उसकी आवाज सुनाई दी। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में आग लग गई और धुएं का गुबार दूर तक दिखाई देता रहा। राहत और बचाव कार्य के लिए पुलिस, प्रशासन और फायर ब्रिगेड की कई टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद फैक्ट्री प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
मामले को लेकर प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा था या नहीं। मजदूरों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री में लंबे समय से सुरक्षा व्यवस्था बेहद खराब थी और कर्मचारियों की जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा था। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मजदूरों की बदहाल स्थिति को लेकर बहस तेज कर दी है।

