तिरुपति मंदिर की 400 साल पुरानी परंपरा में बदलाव, अब कर्नाटक के मंत्री और विधायक भी पहली आरती में हो सकेंगे शामिल

तिरुपति मंदिर की 400 साल पुरानी परंपरा में बदलाव, अब कर्नाटक के मंत्री और विधायक भी पहली आरती में हो सकेंगे शामिल

आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुमला श्री वेंकटेश्वर मंदिर से जुड़ी करीब 400 वर्ष पुरानी परंपरा में अहम बदलाव किया गया है। अब कर्नाटक सरकार के मंत्री, विधायक (MLA) और विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी मंदिर की पहली आरती (सुप्रभात सेवा) में शामिल हो सकेंगे। यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही मांग और दोनों राज्यों के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पहले यह विशेष सम्मान मुख्य रूप से कर्नाटक के कुछ चुनिंदा पारंपरिक प्रतिनिधियों तक सीमित था।

इतिहास के अनुसार, विजयनगर साम्राज्य के समय से कर्नाटक का तिरुमला मंदिर से गहरा संबंध रहा है। उस दौर में कर्नाटक के शासकों और श्रद्धालुओं ने मंदिर के विकास, पूजा-पद्धति और धार्मिक आयोजनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण कुछ विशेष धार्मिक परंपराएं आज भी प्रचलित हैं। नई व्यवस्था के तहत कर्नाटक के जनप्रतिनिधियों को भी निर्धारित नियमों और मंदिर प्रशासन की अनुमति के अनुसार पहली आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव से परंपरा की मूल भावना बरकरार रहेगी और व्यवस्थाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। श्रद्धालुओं के लिए सामान्य दर्शन व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। इस फैसले को कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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