केंद्र सरकार का हाई कोर्ट में जवाब: अग्निवीरों को शहीद सैनिकों जैसे लाभ देने का प्रावधान नहीं

केंद्र सरकार का हाई कोर्ट में जवाब: अग्निवीरों को शहीद सैनिकों जैसे लाभ देने का प्रावधान नहीं

केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अग्निवीरों को मिलने वाले लाभों को लेकर अपना पक्ष रखा है। अग्निवीर मुरली नायक की मां ज्योतिबाई नायक की याचिका पर जवाब देते हुए केंद्र ने कहा कि अग्निवीरों को नियमित सैनिकों के समान मरणोपरांत पेंशन और अन्य सेवा लाभ नहीं दिए जा सकते। सरकार के अनुसार, अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की नियुक्ति चार साल की निश्चित अवधि के लिए होती है, जबकि नियमित सैनिकों की सेवा लंबी अवधि की होती है और पेंशन जैसे लाभ उसी सेवा संरचना से जुड़े होते हैं।

याचिका में मांग की गई थी कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों के परिवारों को भी नियमित सैनिकों की तरह पेंशन और अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने अग्निपथ योजना में अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच किए गए अंतर को भेदभावपूर्ण बताया था। इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि दोनों श्रेणियों की सेवा शर्तें, कार्यकाल और नियुक्ति की प्रकृति अलग-अलग हैं, इसलिए दोनों को एक समान नहीं माना जा सकता। सरकार ने अदालत से याचिका खारिज करने की भी मांग की है।

सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी बताया कि मुरली नायक को युद्ध में हताहत यानी बैटल कैजुअल्टी घोषित किया गया था और उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। केंद्र के अनुसार, अग्निपथ योजना के तहत परिवार को बीमा और मुआवजे की राशि दी गई है, लेकिन पारिवारिक पेंशन जैसे लाभ नियमित सैनिकों के नियमों के तहत आते हैं। अब इस मामले में आगे हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद साफ होगा कि अग्निवीरों के परिवारों को मिलने वाले लाभों को लेकर अदालत क्या रुख अपनाती है।

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