
कूड़े से बने फ्यूल से चलेंगी दिल्ली की बसें! गडकरी बोले- हाइड्रोजन ही भविष्य
नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में हाइड्रोजन ईंधन परिवहन क्षेत्र का भविष्य बन सकता है। उन्होंने कहा कि कूड़े-कचरे और जैविक अपशिष्ट से तैयार होने वाले स्वच्छ ईंधन का उपयोग सार्वजनिक परिवहन में बढ़ाया जाएगा और भविष्य में दिल्ली की बसें भी ऐसे वैकल्पिक ईंधनों पर संचालित हो सकती हैं।
गडकरी ने कहा कि भारत सरकार जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली विकसित करने के लिए कई नई तकनीकों पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नगरों से निकलने वाले ठोस कचरे और जैविक अपशिष्ट से बायो-सीएनजी, बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ईंधन तैयार किए जा सकते हैं, जिससे प्रदूषण कम होगा और कचरा प्रबंधन की समस्या का भी समाधान मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। यदि इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर और कम लागत में संभव हो जाता है, तो बसों, ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को स्वच्छ ईंधन पर चलाना आसान होगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और आयातित पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता भी घटेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले वाहन पारंपरिक डीजल और पेट्रोल वाहनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं। हालांकि, इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, परिवहन और ईंधन भरने के बुनियादी ढांचे का विस्तार करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
केंद्र सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक स्वच्छ, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है। इसी दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी वैकल्पिक ऊर्जा तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कचरे से ईंधन बनाने और हाइड्रोजन आधारित परिवहन परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि कचरा प्रबंधन, ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में भी भारत को दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं।

