
Parliament Security: संसद की सुरक्षा कौन करता है? मेन गेट से सदन तक कितनी अभेद्य है सुरक्षा व्यवस्था
भारत की संसद देश का सबसे संवेदनशील लोकतांत्रिक संस्थान है, इसलिए इसकी सुरक्षा कई स्तरों पर की जाती है। 2023 की सुरक्षा चूक के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए संसद परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को सौंप दी। अब संसद भवन के प्रवेश, स्क्रीनिंग, फ्रिस्किंग और एक्सेस कंट्रोल की जिम्मेदारी मुख्य रूप से CISF के पास है, जबकि दिल्ली पुलिस, खुफिया एजेंसियां और अन्य सुरक्षा बल भी समन्वय के साथ काम करते हैं।
संसद में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति और वाहन की कई स्तरों पर जांच होती है। मेन गेट पर पहचान पत्र का सत्यापन, हाई-टेक स्कैनर, मेटल डिटेक्टर, बैगेज एक्स-रे, बायोमेट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस कंट्रोल जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। संसद परिसर में बड़ी संख्या में CCTV कैमरे, क्विक रिएक्शन टीमें और 24 घंटे निगरानी व्यवस्था तैनात रहती है। संवेदनशील क्षेत्रों में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है।
संसद की सुरक्षा केवल गेट तक सीमित नहीं है। संसद भवन के अंदर, आसपास के इलाके, वीआईपी मूवमेंट, ड्रोन रोधी निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया और खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था लगातार अपडेट की जाती है। संसद सत्र के दौरान सुरक्षा और भी कड़ी कर दी जाती है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

