International Tiger Day 2026: 53 साल में 3,600 से ज्यादा बाघ, जानिए कैसे सफल हुआ प्रोजेक्ट टाइगर और अब क्या हैं नई चुनौतियां

International Tiger Day 2026: 53 साल में 3,600 से ज्यादा बाघ, जानिए कैसे सफल हुआ प्रोजेक्ट टाइगर और अब क्या हैं नई चुनौतियां

हर साल 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जाता है, ताकि बाघों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके। भारत ने वर्ष 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य देश में तेजी से घटती बाघों की आबादी को बचाना था। पिछले 53 वर्षों में यह अभियान दुनिया के सबसे सफल वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। आज भारत दुनिया के अधिकांश जंगली बाघों का घर है और देश में बाघों की संख्या 3,600 से अधिक पहुंच चुकी है।

प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता के पीछे टाइगर रिजर्व का विस्तार, शिकार पर सख्त रोक, आधुनिक निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसी अहम पहल रही हैं। देशभर में दर्जनों टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए हैं, जहां बाघों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यही कारण है कि भारत ने पिछले कुछ दशकों में बाघों की आबादी बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

हालांकि, बढ़ती बाघों की संख्या के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। जंगलों का सिकुड़ना, मानव-वन्यजीव संघर्ष, अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन और विकास परियोजनाओं के कारण आवास का नुकसान संरक्षण के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में केवल बाघों की संख्या बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित आवास, जैव विविधता और मानव-बाघ सह-अस्तित्व को भी सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

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