करूर भगदड़: मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को आज सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी विजय सरकार

करूर भगदड़: मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को आज सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी विजय सरकार

चेन्नई: करूर भगदड़ मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु की विजय सरकार आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। राज्य सरकार हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देगी, जिसमें करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने संबंधी सरकारी आदेश (जीओ) को रद्द कर दिया गया था। राज्य के कानून मंत्री ने पुष्टि की है कि सरकार मंगलवार सुबह ही सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल करेगी।

दरअसल, मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने सोमवार को सुनाए अपने फैसले में कहा था कि सरकारी नौकरियां संवैधानिक भर्ती प्रक्रिया और योग्यता के आधार पर दी जानी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि किसी दुखद घटना के बाद सरकारी नौकरी को मुआवजे या राहत के रूप में नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता और समान अवसर के सिद्धांत प्रभावित होते हैं।

यह मामला सितंबर 2025 में करूर में हुई भीषण भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री विजय सरकार ने पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रत्येक पात्र परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया था। इसी फैसले के तहत 31 से अधिक परिजनों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए थे।

हालांकि इस सरकारी आदेश को जनहित याचिकाओं के जरिए हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि इस तरह की नियुक्तियों को वैध माना गया तो भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं, औद्योगिक हादसों और अन्य त्रासदियों में भी इसी प्रकार सरकारी नौकरी की मांग उठ सकती है, जिससे सार्वजनिक भर्ती व्यवस्था प्रभावित होगी। अदालत ने सरकार को सुझाव दिया कि पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए कौशल विकास, आर्थिक सहायता और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का सहारा लिया जा सकता है।

विजय सरकार का कहना है कि यह फैसला मानवीय आधार पर लिया गया था और इसका उद्देश्य हादसे से प्रभावित परिवारों को स्थायी सहारा देना था। सरकार का यह भी तर्क है कि जिन लोगों को नियुक्ति पत्र दिए गए, उन्हें मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया और उनका पक्ष सुने बिना आदेश पारित कर दिया गया। इन्हीं आधारों पर सरकार अब सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने और राहत देने की मांग करेगी।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि शीर्ष अदालत सरकार की याचिका स्वीकार करती है, तो करूर भगदड़ पीड़ित परिवारों को दी गई सरकारी नौकरियों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, यह मामला सार्वजनिक नियुक्तियों और संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों पर भी एक बड़ी मिसाल बन सकता है।

CATEGORIES
Share This

COMMENTS

Wordpress (0)