
Kanwar Yatra 2026: हरिद्वार, गंगोत्री या गौमुख? जानिए कांवड़ यात्रा में कहां से गंगाजल लाना माना जाता है सबसे पवित्र
सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा भगवान शिव की भक्ति और आस्था का एक बड़ा पर्व माना जाता है। इस यात्रा में श्रद्धालु गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि हरिद्वार, गंगोत्री या गौमुख में से किस स्थान का जल लाना सबसे शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा के हर उद्गम और तीर्थ स्थल का अपना विशेष महत्व है।
हरिद्वार से गंगाजल लाना कांवड़ यात्रियों में सबसे लोकप्रिय परंपराओं में से एक है। मान्यता है कि हरिद्वार में गंगा मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती हैं और यहां स्नान व जल ग्रहण करने का विशेष धार्मिक महत्व है। वहीं, गंगोत्री और गौमुख को गंगा के उद्गम से जुड़े पवित्र स्थान माना जाता है, जहां से जल लाने को कई श्रद्धालु अधिक पुण्यदायी मानते हैं।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, कांवड़ यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण भावना, श्रद्धा और नियमों का पालन माना जाता है। जल किसी भी पवित्र तीर्थ स्थल से लाया जाए, यदि उसे पूरी आस्था और विधि-विधान के साथ भगवान शिव को अर्पित किया जाता है तो उसका विशेष महत्व माना जाता है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु अलग-अलग तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर शिवालयों तक पहुंचते हैं।

