
पाकिस्तान में जमीयत प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान का असीम मुनीर पर तीखा हमला, बोले- ‘हिम्मत है तो वर्दी उतारो और चुनाव लड़ो’
पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो वह सेना की वर्दी उतारकर लोकतांत्रिक राजनीति में आएं और चुनाव लड़कर अपनी लोकप्रियता साबित करें। मौलाना के इस बयान ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की राजनीति में सेना का हस्तक्षेप लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए और देश के सभी संस्थानों को संविधान द्वारा तय की गई सीमाओं के भीतर रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब राजनीतिक फैसले निर्वाचित नेताओं के हाथ में होंगे।
मौलाना ने अपने भाषण में कहा कि यदि कोई व्यक्ति जनता का समर्थन होने का दावा करता है तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव मैदान में उतरना चाहिए। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सेना की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश को संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार चलाया जाना चाहिए, न कि किसी दूसरे तरीके से।
मौलाना फजलुर रहमान के इस बयान के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। हालांकि, पाकिस्तान सेना की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान आने वाले समय में पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और नागरिक-सैन्य संबंधों पर नई बहस को जन्म दे सकते हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान में लंबे समय से सेना की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद रहे हैं। विपक्षी नेता समय-समय पर सैन्य प्रतिष्ठान पर राजनीति में दखल देने के आरोप लगाते रहे हैं, जबकि सेना हमेशा इन आरोपों से इनकार करती रही है। मौजूदा बयान को भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है।

