योगिनी एकादशी आज: जानें पूजा का सही मुहूर्त, व्रत विधि, मंत्र और पारण का समय

योगिनी एकादशी आज: जानें पूजा का सही मुहूर्त, व्रत विधि, मंत्र और पारण का समय

आज योगिनी एकादशी का पावन व्रत मनाया जा रहा है। यह आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी मानी जाती है और भगवान विष्णु की पूजा, उपवास तथा भक्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन व्रत करने से पापों का नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है।

योगिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

विवरण

समय

एकादशी तिथि प्रारंभ

9 जुलाई 2026, सुबह 6:16 बजे

एकादशी तिथि समाप्त

10 जुलाई 2026, सुबह 7:21 बजे

व्रत रखने का दिन

10 जुलाई 2026, शुक्रवार

पारण का समय

11 जुलाई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:16 बजे तक

पूजा का शुभ समय

योगिनी एकादशी की पूजा प्रातः स्नान के बाद करना सर्वोत्तम माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त से लेकर पूर्वाह्न तक भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

योगिनी एकादशी व्रत विधि

  • प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाएं।

  • भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

  • विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।

  • दिन भर सात्विक आचरण रखें और यथाशक्ति उपवास करें।

  • रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण और भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है।

पूजा मंत्र

योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

इसके अतिरिक्त ॐ विष्णवे नमः मंत्र का भी जप किया जा सकता है।

पारण का समय और नियम

एकादशी व्रत का पारण 11 जुलाई 2026 को द्वादशी तिथि में निर्धारित समय के भीतर करना चाहिए। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करें और फिर जल, फल या सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत खोलें। पारण का समय सुबह 5:31 बजे से 8:16 बजे तक शुभ माना गया है।

योगिनी एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

नोट: मुहूर्त और पारण समय स्थान विशेष के अनुसार थोड़ा बदल सकता है। अधिक सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से परामर्श लेना उचित होगा।

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