
Sultanpur News: रियल स्टेट कम्पनी पर निवेशकों से लाखों हड़पने का आरोप, निदेशक व सह-निदेशक पर होगी अग्रिम जांच
Sultanpur News: लखनऊ में प्लाट दिलाने के नाम पर दर्जनों निवेशकों से लाखों रुपये हड़पने से जुड़े बहुचर्चित मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) नवनीत सिंह की अदालत ने विवेचक द्वारा दी गई क्लीनचिट रिपोर्ट को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने आवश्यक बिंदुओं पर दोबारा और निष्पक्ष तरीके से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
सीओ सिटी को निगरानी का निर्देश
अदालत ने नगर कोतवाल को निर्देश दिया है कि वे कोर्ट के आदेशों के अनुसार निष्पक्ष अग्रिम विवेचना कराएं। साथ ही क्षेत्राधिकारी (सीओ) सिटी को पूरे मामले की निगरानी करने को कहा गया है। अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 5 दिसम्बर को रिपोर्ट तलब की है।
मामले से जुड़ी घटनाएं वर्ष 2015 की बताई जाती हैं। वादी का आरोप है कि उस समय के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) सर्वेश कुमार पांडेय ने ही उनका आरोपियों से परिचय कराया था और रियल स्टेट कंपनी के बारे में जानकारी दी थी।
वादी का आरोप: ‘सब्जबाग दिखाकर लाखों रुपये हड़पे’
कूरेभार थाना क्षेत्र के निदूरा गांव निवासी वादी उदय कुमार कोविद ने 17 सितम्बर 2023 को अदालत के आदेश के बाद कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया।
वादी के अनुसार, लखनऊ के विनीत नगर विस्तार में रहने वाली खालसा रियल स्टेट कम्पनी के निदेशक जोगेन्दर सिंह, सह-निदेशक सुरिन्दर कौर और सेल्स मैनेजर राम नायक पाण्डेय ने अमृत कृपा नाम से एक साइट प्लान दिखाया और लखनऊ में प्लॉट दिलाने का भरोसा दिया।
वादी समेत दर्जनभर निवेशकों को प्लॉट देने का सपना दिखाकर आरोपियों ने लाखों रुपये वसूल लिए, लेकिन न तो जमीन दी गई और न ही पैसे लौटाए। पुलिस अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर वादी को अदालत की शरण लेनी पड़ी।
जांच के बाद निदेशक और सह-निदेशक को मिली थी क्लीनचिट
पुलिस ने लम्बी जांच के बाद निदेशक जोगेन्दर सिंह और सह-निदेशक सुरिन्दर कौर को क्लीनचिट देते हुए केवल सेल्स मैनेजर राम नायक पाण्डेय के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था। इसी रिपोर्ट को वादी पक्ष ने चुनौती दी और अधिवक्ता के माध्यम से प्रोटेस्ट अर्जी दाखिल कर दोनों मुख्य आरोपियों की भूमिका को अहम बताते हुए उनके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुन: जांच की मांग की।
CJM ने माना विवेचक की कार्यशैली संदिग्ध
सुनवाई के दौरान अदालत ने वादी पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को पर्याप्त माना और विवेचक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सीजेएम नवनीत सिंह ने क्लीनचिट रिपोर्ट को खारिज करते हुए विवेचना के सभी अभिलेख लौटाने का आदेश दिया। अदालत के निर्देश पर अब मामले में अग्रिम जांच होगी और इसकी निगरानी स्वयं संबंधित क्षेत्राधिकारी करेंगे।
रिपोर्ट – अंकुश यादव

