
*सुल्तानपुर: एडिशनल एसपी हरेंद्र कुमार व सीओ अखिलेश वर्मा बतौर अभियुक्त तलब,डीजीपी व प्रमुख सचिव-गृह को विभागीय जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कोर्ट ने भेजा आदेश*
*एडिशनल एसपी हरेंद्र कुमार व सीओ अखिलेश वर्मा बतौर अभियुक्त तलब,डीजीपी व प्रमुख सचिव-गृह को विभागीय जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कोर्ट ने भेजा आदेश*
*हमले के आरोपी को लाभ दिलाने के लिए पद का दुरूपयोग कर विवेचना में खेल करने का मामला*
*जब तक आरोपी विक्रम विवेक सिंह को नहीं मिली क्लीनचिट,तब तक वापस होती रही जांच रिपोर्ट*
————————————–
सुल्तानपुर। प्रधानी के चुनाव की रंजिश में हमले एवं एससी- एसटी एक्ट के आरोप से जुड़े मामले में नामजद आरोपी विक्रम विवेक सिंह को क्लीनचिट देने की मंशा से लाभ पहुंचाने के लिए बार-बार विवेचना रिपोर्ट वापस करने एवं क्लीनचिट मिलने के बाद जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने पर स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट की अदालत ने बड़ा संज्ञान लिया है। शुक्रवार को स्पेशल जज राकेश पांडेय की अदालत ने वादी की प्रोटेस्ट अर्जी का निपटारा करते हुए मामले में तत्कालीन एएसपी अमेठी व वर्तमान एएसपी अंबेडकर नगर हरेंद्र कुमार व तत्कालीन सीओ अखिलेश वर्मा को क्लीनचिट पाए आरोपी विक्रम विवेक सिंह के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचने सहित सात गम्भीर धाराओ के अपराध में शामिल पाते हुए उन्हें अभियुक्त की तरह विचारण का सामना करने के लिए 29 जुलाई की तारीख पर तलब किया है। अदालत ने मामले में प्रथम दृष्ट्या दोषी मिले एएसपी हरेंद्र कुमार व सीओ अखिलेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर डीजीपी एवं प्रमुख सचिव(गृह) को अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया है। अदालत के इस आदेश से पुलिस महकमें हड़कंप मच गया है।
अमेठी जिले के गौरीगंज कोतवाली के पूरे गोसाई मजरे सुजानपुर के रहने वाले वादी वीरेंद्र कुमार ने 25 मार्च साल 2024 की घटना बताते हुए स्थानीय कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। उनके आरोप के मुताबिक वह और उनके भाई राकेश कुमार घटना की तारीख पर शाम करीब चार बजे लम्भी चौराहा जा रहे थे। इसी दौरान स्थानीय कोतवाली के बसुपुर गांव निवासी आरोपी नरेंद्र सिंह, उनके पुत्र विक्रम विवेक सिंह,सह आरोपी धर्मेद्र उर्फ मोनू सिंह व प्रदीप सिंह निवासी सुब्बा सिंह का पुरवा एवं पूरे भगवान मजरे तुलसीपुर निवासी आरोपी कपिल देव पाठक अपने कुछ अज्ञात साथियो के साथ तीन गाड़ियों से आए और प्रधानी के चुनाव की रंजिश को लेकर उन पर हमला बोल दिए। आरोप के मुताबिक हमले में वादी के भाई राकेश को गंभीर चोटे आई, जिन्हें जिला अस्पताल गौरीगंज लाया गया और हालत गम्भीर होने पर लखनऊ रेफर कर दिया गया। वादी की तहरीर पर मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और प्रकरण की जांच तत्कालीन सीओ को मिली,जिन्होंने पांचो नामजद आरोपियो के खिलाफ अपराध साबित पाते हुए नौ फरवरी साल 2024 को चार्जशीट तैयार कर एएसपी के पास भेजा,पर तत्कालीन पर्यवेक्षण अधिकारी एएसपी हरेंद्र कुमार ने अगले दिन ही पुनः गहन जांच व साक्ष्य संकलन के लिए चार्जशीट वापस कर दिया। मामले की अग्रिम जांच में सीओ मयंक द्विवेदी ने पुनः सभी आरोपियो को चार्जशीटेड करते हुए 11 अप्रैल 2024 को जांच रिपोर्ट एएसपी के पास भेजा,पर एसएसपी ने पुनः जांच में खामी बताते हुए अग्रिम जांच के लिए चार्जशीट वापस कर दिया। मामले की अग्रिम जांच चल ही रही थी,इसी बीच सीओ मयंक द्विवेदी का सिद्धार्थ नगर जनपद के लिए ट्रांसफर हो गया और विवेचना माह अगस्त साल 2024 में तत्कालीन सीओ अखिलेश वर्मा के सुपुर्द हो गई। सीओ अखिलेश वर्मा ने भी अपनी जांच में सभी आरोपियों के खिलाफ अपराध की पुष्टि पाते हुए चार्जशीट एडिशनल एसपी के पास भेजा,पर एएसपी हरेंद्र कुमार ने दोबारा कमी बताते हुए विवेचना रिपोर्ट को वापस कर दिया। जिसके बाद चली मामले की अग्रिम जांच में आरोपी विक्रम विवेक सिंह की मोबाइल लोकेशन व उनके पक्ष के कुछ गवाहों के साक्ष्य शपथ पत्र को आधार बनाते हुए एवं पीड़ित पक्ष के साक्ष्यों व गवाहों को नजरअंदाज करते हुए सीओ अखिलेश वर्मा ने पहले चार्जशीटेड हो चुके आरोपी विक्रम विवेक सिंह को क्लीनचिट दे दिया और शेष चार आरोपियो के खिलाफ अपराध साबित बताते हुए आरोप पत्र एएसपी के पास भेज दिया,जिसके बाद विवेचना रिपोर्ट को पर्यवेक्षण अधिकारी हरेंद्र कुमार ने कोर्ट में दाखिल करने के लिए अग्रसारित कर दिया। इस तरह से आरोपी विक्रम विवेक सिंह को बचाने के लिए बार-बार अग्रिम जांच व पूर्व की चार्जशीट निरस्त करने का खेल चलता रहा। चहेते को क्लीनचिट मिलने के बाद अदालत में आरोप पत्र पहुंचने पर वादी वीरेंद्र कुमार ने आरोपी विक्रम विवेक सिंह को क्लीनचिट देने की पुलिस जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताई और आरोपी विक्रम विवेक सिंह को भी बतौर अभियुक्त तलब करने की मांग किया। अदालत ने मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस अफसरो की जांच में मिली बड़ी खामियों पर संज्ञान लेते हुए यह कड़ा कदम उठाया है। अदालत ने डीजीपी एवं प्रमुख सचिव गृह को सेवा नियमावली के मुताबिक मामले में जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश जारी किया है। अदालत की इस बड़ी कार्यवाही से पद का दुरुपयोग कर आरोपी को संरक्षण देने वाले पुलिस अफसरों को बड़ी सबक मिली है। स्पेशल कोर्ट के इस आदेश की कार्यवाही से बचने के लिए आरोपी विक्रम विवेक सिंह एवं आरोपी पुलिस अफसरों की तरफ से जल्द ही हाईकोर्ट की शरण लेने की चर्चाएं तेज है।

