12 साल में बदला राजनीतिक परिदृश्य! कैसे मोदी ने गढ़ा ‘भगवा भारत’ का नया मॉडल?

12 साल में बदला राजनीतिक परिदृश्य! कैसे मोदी ने गढ़ा ‘भगवा भारत’ का नया मॉडल?

साल 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi और Bharatiya Janata Party ने भारतीय राजनीति में कई बड़े बदलाव किए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने केवल चुनावी जीत पर ही नहीं, बल्कि संगठन विस्तार, बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क, कल्याणकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार और राष्ट्रवाद के मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी पकड़ मजबूत की। इसी रणनीति के चलते पार्टी ने उन राज्यों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई, जहां पहले उसका प्रभाव सीमित माना जाता था।

पिछले 12 वर्षों में भाजपा ने हिंदुत्व, विकास और मजबूत नेतृत्व की छवि को एक साथ आगे बढ़ाया। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 हटाना, तीन तलाक कानून और नागरिकता संशोधन कानून जैसे फैसलों ने पार्टी के मुख्य समर्थक वर्ग को मजबूत संदेश दिया। वहीं उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं के जरिए करोड़ों लाभार्थियों तक सीधा पहुंच बनाने का प्रयास किया गया। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा के सामाजिक और वैचारिक विस्तार की बड़ी रणनीति मानते हैं।

इसके अलावा भाजपा ने डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया और जमीनी संगठन को एक साथ जोड़कर चुनावी राजनीति का नया मॉडल तैयार किया। पार्टी का फोकस केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को भी चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। यही कारण है कि कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मजबूत मौजूदगी के बावजूद भाजपा लगातार अपना जनाधार बढ़ाने में सफल रही।

हालांकि विपक्ष इस दौर को संस्थाओं और लोकतांत्रिक विमर्श पर बढ़ते दबाव के रूप में देखता है, जबकि भाजपा समर्थक इसे भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर बताते हैं। ऐसे में “भगवा भारत” शब्द राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। समर्थकों के लिए यह भाजपा की वैचारिक सफलता का प्रतीक है, जबकि आलोचक इसे भारतीय राजनीति के बढ़ते ध्रुवीकरण के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों की राजनीतिक यात्रा आज भी देश की सबसे बड़ी चर्चाओं में शामिल है।

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