
ईरान युद्ध का असर दिखना शुरू, अप्रैल में थोक महंगाई ने बनाया नया रिकॉर्ड
ईरान और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध जैसे हालात के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका सीधा असर भारत के आयात खर्च और बाजार कीमतों पर पड़ा है। पेट्रोल-डीजल, गैस और ट्रांसपोर्ट महंगा होने से कई सेक्टर प्रभावित हो रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI आधारित महंगाई दर में बड़ा उछाल देखने को मिला। खाद्य पदार्थों, ईंधन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ने से बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। खासतौर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने उद्योगों की लागत बढ़ा दी है, जिससे कंपनियां अब उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर भी इसका असर और ज्यादा देखने को मिल सकता है।
महंगाई बढ़ने से आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं के दाम बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है, जबकि व्यापार और उद्योग जगत भी लागत बढ़ने से परेशान है। विपक्ष ने भी बढ़ती महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती है और अंतरराष्ट्रीय हालात कब तक सामान्य होते हैं।

