अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर विवाद: पाकिस्तान की भूमिका पर इसराइल को शक, लेबनान मुद्दे पर बढ़ा तनाव

अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर विवाद: पाकिस्तान की भूमिका पर इसराइल को शक, लेबनान मुद्दे पर बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही युद्धविराम वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। भारत में इसराइल के राजदूत Reuven Azar ने पाकिस्तान की “मध्यस्थ” भूमिका पर खुलकर संदेह जताया है।

उन्होंने साफ कहा कि इसराइल, पाकिस्तान को एक भरोसेमंद देश के रूप में नहीं देखता। उनके अनुसार, अमेरिका के अपने रणनीतिक कारण हो सकते हैं, लेकिन इसराइल का मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लेबनान में Hezbollah के आतंकी ढांचे को खत्म करना है।


🇵🇰 पाकिस्तान की घोषणा और इसराइल का विरोध

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने हाल ही में अमेरिका, ईरान और इसराइल के बीच युद्धविराम की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इस समझौते के तहत लेबनान पर कोई हमला नहीं होगा।

लेकिन इसराइल ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।

⚠️ पहले ही दिन सामने आए मतभेद

युद्धविराम के पहले ही दिन इसराइल और पाकिस्तान के बीच लेबनान को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए। ईरान ने भी लेबनान पर हमले को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए Reuven Azar ने कहा:

“हम पाकिस्तान को एक विश्वसनीय देश के रूप में नहीं देखते। अमेरिका ने अपने कारणों से उसका इस्तेमाल करने का फैसला किया है।”


🌍 इसराइल में भी बढ़ी नाराजगी

इस युद्धविराम को इसराइल के भीतर भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी दल और रणनीतिक विशेषज्ञ इसे एक बड़ा झटका मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस पूरे समझौते में इसराइल को पूरी तरह भरोसे में नहीं लिया गया।


📌 निष्कर्ष

अमेरिका-ईरान युद्धविराम की यह कोशिश जहां एक ओर शांति की दिशा में कदम मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर इससे नए विवाद और कूटनीतिक तनाव भी पैदा हो गए हैं। खासतौर पर पाकिस्तान की भूमिका और लेबनान को लेकर असहमति ने इस समझौते को और जटिल बना दिया है।

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