गुलजार सिंह केस: SP-SSP दफ्तर घेरेगी कांग्रेस, हरपाल सिंह चीमा पर FIR की मांग

गुलजार सिंह केस: SP-SSP दफ्तर घेरेगी कांग्रेस, हरपाल सिंह चीमा पर FIR की मांग

आपके दिए शीर्षक और ताजा घटनाक्रम के आधार पर खबर को विस्तार से तैयार किया है। इसमें आरोपों और आधिकारिक रूप से दर्ज तथ्यों को अलग रखा गया है, क्योंकि हरपाल सिंह चीमा का नाम दर्ज FIR में आरोपी के तौर पर नहीं है। (AajTak)

चंडीगढ़: पंजाब के संगरूर में गुलजार सिंह की मौत का मामला अब लगातार सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से पुलिस के SP और SSP कार्यालयों का घेराव करने और पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग उठाई जा रही है। गुलजार सिंह ने गांव में नशे की समस्या और अपने बेटे की कथित नशे की लत को लेकर हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था, जिसके बाद उनकी मौत का मामला विवादों में आ गया।

मामला संगरूर जिले के दिड़बा विधानसभा क्षेत्र के तूर बंजारा गांव का है। रिपोर्टों के मुताबिक, 6 सितंबर को एक कार्यक्रम के दौरान गुलजार सिंह ने सार्वजनिक रूप से गांव में नशीले पदार्थों की उपलब्धता का मुद्दा उठाया था। उन्होंने अपने बेटे की नशे की समस्या का भी जिक्र किया था। इसके बाद परिवार की ओर से आरोप लगाए गए कि गुलजार सिंह पर पंचायत से जुड़े कुछ लोगों ने दबाव बनाया और कथित तौर पर उन्हें परेशान किया गया।

इसके बाद गुलजार सिंह ने जहरीला पदार्थ खा लिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए वीडियो और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि नशे के मुद्दे पर सवाल उठाने के बाद गुलजार सिंह को दबाव और कथित उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस ने मामले में गांव के सरपंच समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट के तहत धाराएं लगाई गई हैं। शुरुआती रिपोर्टों में चार आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय SIT भी गठित की गई है।

इस पूरे मामले में सबसे अहम राजनीतिक विवाद हरपाल सिंह चीमा की भूमिका को लेकर है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने चीमा के खिलाफ FIR दर्ज करने और उनके इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी चीमा के खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग उठाई है। वहीं, पंजाब कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।

हालांकि, मौजूदा FIR में हरपाल सिंह चीमा को आरोपी नहीं बनाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, चीमा का कहना है कि उन्होंने गुलजार सिंह की शिकायत सुनी थी और नशे की बिक्री से जुड़े मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। दूसरी तरफ, गांव के आरोपी पक्ष की ओर से भी गुलजार सिंह को परेशान करने के आरोपों से इनकार किया गया है।

मामले में एक और अहम मोड़ तब आया जब गुलजार सिंह के बेटे लखविंदर सिंह ने बाद में कहा कि वह सरकार की जांच से संतुष्ट हैं और उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात सामने आई थी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। इससे मामले की शुरुआती तस्वीर के मुकाबले राजनीतिक और कानूनी स्थिति कुछ अलग नजर आने लगी है।

वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह इस मामले को सिर्फ एक स्थानीय घटना के तौर पर नहीं देख रही, बल्कि इसे पंजाब में नशे की समस्या और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर देख रही है। पार्टी पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के कार्यालयों के घेराव के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में है। कांग्रेस की प्रमुख मांगों में हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ FIR और मामले की निष्पक्ष जांच शामिल है।

फिलहाल मामले की जांच SIT के हाथ में है और पुलिस द्वारा दर्ज FIR में नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। हरपाल सिंह चीमा का नाम FIR में आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है। ऐसे में अब जांच रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही यह साफ होगा कि गुलजार सिंह की मौत के लिए वास्तव में कौन जिम्मेदार था और आगे किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है।

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