
बागपत की बेटी तान्या ने रचा इतिहास, हैमर थ्रो में बनाया नेशनल रिकॉर्ड
बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की बेटी और अंतरराष्ट्रीय हैमर थ्रो खिलाड़ी तान्या चौधरी ने खेल जगत में एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गाधी गांव की रहने वाली तान्या ने नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित इंडियन एथलेटिक्स फाइनल सीरीज-2026 में महिला हैमर थ्रो में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम कर दिया। तान्या ने 68.35 मीटर की शानदार थ्रो कर नया कीर्तिमान बनाया और पूरे देश के साथ-साथ अपने गांव का नाम भी रोशन किया।
तान्या की 68.35 मीटर की यह थ्रो बेहद खास रही। उन्होंने अनुष्का यादव के 67.02 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए महिला हैमर थ्रो में नया रिकॉर्ड अपने नाम किया। रिकॉर्ड टूटते ही खेल जगत में तान्या की उपलब्धि की चर्चा शुरू हो गई। वहीं, जैसे ही उनके रिकॉर्ड बनाने की खबर बागपत के गाधी गांव पहुंची, वहां खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के लोगों, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई और तान्या को बधाई दी।
तान्या चौधरी की यह उपलब्धि अचानक हासिल हुई कामयाबी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास की कहानी है। बेहद साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली तान्या ने खेल के मैदान में अपनी मेहनत के दम पर अलग पहचान बनाई है। शुरुआत में उन्होंने दौड़ में अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन बाद में हैमर थ्रो को अपना मुख्य खेल बनाया और इसी में लगातार बेहतर प्रदर्शन करती चली गईं।
तान्या के संघर्ष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बेहतर प्रशिक्षण हासिल करने के लिए वह रोजाना करीब 25 किलोमीटर दूर डौलचा गांव तक जाती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटीं। दिल्ली में भी उन्होंने नियमित प्रशिक्षण और अभ्यास पर पूरा ध्यान दिया। उनकी मेहनत का नतीजा धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली उपलब्धियों के रूप में सामने आने लगा।
साल 2025 में तान्या ने खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। तान्या वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में जर्मनी और चीन में भारत के लिए खेल चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम करना उनके खेल करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गई है।
तान्या की उपलब्धियों को देखते हुए वर्ष 2026 में उन्हें रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। लगातार मिल रहे सम्मान और पदक इस बात का प्रमाण हैं कि तान्या ने बेहद कम उम्र में खेल के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
रिकॉर्ड बनने के बाद तान्या के परिजनों ने भी खुशी जताई। परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा है और वह आने वाले समय में देश के लिए इससे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगी। परिजनों को उम्मीद है कि तान्या अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम और ऊंचा करेंगी।
बागपत की इस बेटी की कहानी उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। तान्या चौधरी ने दिखा दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो छोटे गांव से निकलकर भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रचा जा सकता है।

