राम मंदिर के नए CEO पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, बोले- ‘सिर्फ नियुक्ति से मामला खत्म नहीं होगा’

राम मंदिर के नए CEO पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, बोले- ‘सिर्फ नियुक्ति से मामला खत्म नहीं होगा’

पटना/अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट में रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किए जाने के बाद इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने भी नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल नए व्यक्ति को जिम्मेदारी देने से पूरा मामला खत्म नहीं होगा।

प्रशांत किशोर ने बिहार के गयाजी में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार को राम मंदिर से जुड़े चोरी और गबन के आरोपों पर कार्रवाई के बारे में जवाब देना चाहिए। उनका कहना था कि राम मंदिर देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है और यदि वहां वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं तो उनकी जांच और कार्रवाई जरूरी है।

पहली बार CEO की नियुक्ति

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला CEO नियुक्त किया है। वह भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल हैं और रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था। ट्रस्ट में CEO का पद बनाने का फैसला मंदिर से जुड़े प्रशासन और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मंदिर से जुड़े दान की कथित चोरी को लेकर विवाद सामने आया था। इसी पृष्ठभूमि में ट्रस्ट के शीर्ष स्तर पर कई बदलाव भी किए गए हैं।

‘मामला खत्म नहीं होने वाला’

प्रशांत किशोर ने नियुक्ति को लेकर कहा कि नए व्यक्ति को नियुक्त करने से मामला खत्म नहीं होगा। उनके मुताबिक, पहले सामने आए कथित चोरी-गबन के आरोपों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और जिम्मेदारी तय करने के लिए कार्रवाई होनी चाहिए।

हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चोरी या गबन से जुड़े आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी। किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगना अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं है।

मंदिर ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव

CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रस्ट ने नए पदाधिकारियों और ट्रस्टियों की नियुक्ति की है तथा प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। इन बदलावों का उद्देश्य मंदिर के बढ़ते संचालन और श्रद्धालुओं से जुड़े प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करना भी बताया जा रहा है।

राजनीतिक बहस फिर तेज

राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय रहा है। अब CEO की नियुक्ति के बाद प्रशांत किशोर की टिप्पणी ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ ट्रस्ट प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी नेता पुराने आरोपों पर जवाबदेही और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, लेकिन प्रशांत किशोर का कहना है कि इससे पहले उठे वित्तीय अनियमितताओं के सवाल अपने आप समाप्त नहीं होते। अब इन आरोपों की जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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