तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, दो हफ्ते में करना होगा सरेंडर; 22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, दो हफ्ते में करना होगा सरेंडर; 22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली। दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी सरेंडर से छूट की मांग को खारिज करते हुए दो सप्ताह के भीतर संबंधित जेल में आत्मसमर्पण करने और सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने का निर्देश दिया है। अब उनकी अपील पर अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उन्हें अपनी जूनियर सहयोगी से दुष्कर्म के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। हाई कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। तेजपाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मांग की गई थी कि उनकी मुख्य अपील लंबित रहने तक उन्हें सरेंडर से राहत दी जाए।

2013 के मामले में 10 साल की सजा

यह मामला वर्ष 2013 का है। तरुण तेजपाल पर अपनी एक जूनियर महिला सहयोगी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। मामले की सुनवाई के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया और बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई।

सजा के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। इसी अपील के लंबित रहने का हवाला देते हुए उन्होंने तत्काल जेल जाने से छूट की मांग की थी।

कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील रखी। उन्होंने कहा कि मामला 2013 का है और तेजपाल लगभग छह महीने को छोड़कर बाकी अवधि में जमानत पर रहे हैं।

सिब्बल ने अदालत को यह भी बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने सजा सुनाने के साथ ही सजा पर अंतरिम रोक लगा दी थी। उन्होंने तेजपाल की उम्र, उनके परिवार और उनकी दो बेटियों का भी हवाला दिया।

उनकी ओर से यह तर्क दिया गया कि जमानत पर रहने के दौरान तेजपाल के खिलाफ किसी तरह के दुर्व्यवहार की शिकायत या रिपोर्ट सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं और इन परिस्थितियों को देखते हुए सजा पर रोक लगाई गई थी।

कपिल सिब्बल ने यह भी दलील दी कि इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर बहस करने की जरूरत नहीं है। फिलहाल अदालत को केवल यह तय करना चाहिए कि तेजपाल को सरेंडर करने से छूट दी जा सकती है या नहीं। उन्होंने मुख्य अपील पर सीधे सुनवाई किए जाने की मांग भी रखी।

गोवा सरकार ने किया विरोध

तेजपाल की सरेंडर से छूट की मांग का गोवा सरकार की ओर से विरोध किया गया। गोवा पुलिस की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने सरकार का पक्ष रखा।

तुषार मेहता ने कहा कि हाई कोर्ट ने सजा पर रोक इसलिए लगाई थी ताकि तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने और वहां सरेंडर से छूट की मांग करने का अवसर मिल सके। इसका यह अर्थ नहीं है कि उन्हें बिना किसी अलग राहत के सरेंडर किए बिना अपनी मुख्य अपील पर सुनवाई की अनुमति दे दी जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरेंडर से छूट चाहिए थी तो इसके लिए अलग से आवेदन किया जाना चाहिए था। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि तेजपाल को करीब 10 साल की सजा सुनाई गई है और अपराध की प्रकृति गंभीर है। ऐसे में उन्हें जेल जाने से छूट नहीं दी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस आलोक अराधे ने मामले में हाई कोर्ट के फैसले में दर्ज परिस्थितियों पर गौर किया। अदालत ने अपराध की प्रकृति और सजा की अवधि को महत्वपूर्ण माना।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तेजपाल को सरेंडर से राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही उन्हें सरेंडर सर्टिफिकेट भी जमा करना होगा।

हालांकि, उनकी मुख्य अपील पर सुनवाई जारी रहेगी। इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की गई है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तरुण तेजपाल को निर्धारित समयसीमा के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। इसके बाद उनकी सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर अदालत में आगे सुनवाई होगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को चुनौती देने वाली मुख्य अपील पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत का मौजूदा आदेश केवल सरेंडर से छूट की मांग से संबंधित है। ऐसे में 22 सितंबर की सुनवाई पर इस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

तरुण तेजपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि अपील लंबित होने के बावजूद फिलहाल उन्हें जेल में सरेंडर करना ही होगा।

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