
CBI, NIA समेत केंद्रीय एजेंसियों में अब 7 साल का डेप्यूटेशन, गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने केंद्रीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों में अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति यानी डेप्यूटेशन को लेकर बड़ा बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने विशेषज्ञता और प्रशिक्षित अधिकारियों को लंबे समय तक संबंधित एजेंसियों में बनाए रखने के उद्देश्य से कुछ महत्वपूर्ण संगठनों में सात साल तक की प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था को मंजूरी दी है। हालांकि, अलग-अलग एजेंसियों और कैडर के लिए डेप्यूटेशन के नियम अलग-अलग हैं, इसलिए इसे सभी केंद्रीय एजेंसियों पर एक समान लागू होने वाला नियम मानना सही नहीं होगा।
गृह मंत्रालय की मौजूदा नीति के मुताबिक, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स के कर्मचारियों के लिए सामान्य केंद्रीय संगठनों में प्रतिनियुक्ति आम तौर पर पांच साल की होती है, जिसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सात साल तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, विशेष प्रकृति के काम वाली कुछ एजेंसियों में शुरुआत से ही सात साल की प्रतिनियुक्ति का प्रावधान है।
किन एजेंसियों में सात साल की व्यवस्था?
मंत्रालय की नीति में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) में विशेष प्रकृति के काम को देखते हुए सात साल की प्रतिनियुक्ति का प्रावधान किया गया है। बाद में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया। इन संगठनों में सात साल की अवधि शुरुआती नियुक्ति के समय ही तय किए जाने का प्रावधान है और सामान्य तौर पर इसके बाद अतिरिक्त विस्तार नहीं दिया जाता।
वहीं CBI में डेप्यूटेशन की व्यवस्था अलग नियमों के तहत संचालित होती है। उपलब्ध सरकारी नीतियों में CBI जैसे केंद्रीय पुलिस संगठनों में सामान्य अवधि पांच वर्ष और निर्धारित परिस्थितियों में अधिकतम सात वर्ष तक विस्तार का प्रावधान रहा है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
केंद्रीय एजेंसियों में काम करने वाले अधिकारियों को अक्सर लंबे प्रशिक्षण, विशेष जांच तकनीकों और संवेदनशील मामलों का अनुभव हासिल करना पड़ता है। यदि अधिकारी कुछ वर्षों बाद अपने मूल कैडर में वापस लौट जाते हैं तो एजेंसी को अनुभवी मानव संसाधन की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
सात साल की लंबी अवधि का उद्देश्य इसी तरह की समस्या को कम करना और एजेंसियों में संस्थागत अनुभव, विशेषज्ञता और प्रशिक्षित मानव संसाधन को बनाए रखना है।
हाल ही में इसी तर्क के आधार पर गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स के कर्मियों की NSG में प्रतिनियुक्ति अवधि भी सात साल करने का निर्णय लिया था। पहले वहां पांच साल की अवधि थी, जिसे एक-एक साल के दो विस्तार के जरिए बढ़ाया जा सकता था। मंत्रालय के मुताबिक, लंबी अवधि से प्रशिक्षित कमांडो की विशेषज्ञता और संस्थागत अनुभव को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
CBI में भी लंबी अवधि का प्रावधान
CBI में तैनात अधिकारियों के लिए भी सात साल तक की कुल डेप्यूटेशन अवधि के उदाहरण सामने आते रहे हैं। मौजूदा नीति और न्यायिक रिकॉर्ड बताते हैं कि सामान्य पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त अवधि की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह अपने आप मिलने वाला अधिकार नहीं है।
इसका मतलब यह है कि किसी अधिकारी को सिर्फ सात साल की नीति के आधार पर संबंधित एजेंसी में बने रहने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। डेप्यूटेशन की अवधि संबंधित नियमों, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और कैडर की जरूरतों के आधार पर तय होती है।
IPS अधिकारियों के लिए भी बदले हैं नियम
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए IPS अधिकारियों की पात्रता को लेकर भी गृह मंत्रालय समय-समय पर बदलाव करता रहा है। मौजूदा नीति के अनुसार, पांच साल की सेवा पूरी कर चुके IPS अधिकारियों को R&AW, IB, NIA और CBI में SP स्तर के पदों पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए पात्र माना जा सकता है। इसका उद्देश्य केंद्रीय एजेंसियों में अधिकारियों की कमी को दूर करना भी है।
एजेंसियों को क्या फायदा होगा?
सात साल की प्रतिनियुक्ति से सबसे बड़ा फायदा उन एजेंसियों को होने की उम्मीद है जहां अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण और संवेदनशील जांच का अनुभव हासिल करना पड़ता है। लंबे समय तक अधिकारी के बने रहने से किसी जांच या ऑपरेशन की निरंतरता प्रभावित होने की संभावना कम होगी।
इसके अलावा, बार-बार अधिकारियों के आने-जाने से होने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया भी कम हो सकती है। प्रशिक्षित अधिकारियों को लंबे समय तक बनाए रखने से एजेंसी की कार्यक्षमता और विशेषज्ञता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन हर एजेंसी के लिए नियम एक जैसे नहीं
यहां यह समझना जरूरी है कि CBI, NIA, NCB, NDRF, NSG और अन्य केंद्रीय संगठनों के डेप्यूटेशन नियम एक जैसे नहीं हैं। अलग-अलग संगठनों के लिए गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की अलग-अलग नीतियां लागू होती हैं।
इसलिए सात साल की प्रतिनियुक्ति को लेकर किसी अधिकारी का कार्यकाल तय करते समय संबंधित एजेंसी के भर्ती नियम, डेप्यूटेशन गाइडलाइन और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी को देखा जाता है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का फोकस अब केंद्रीय जांच और सुरक्षा संगठनों में विशेषज्ञ अधिकारियों को लंबे समय तक बनाए रखने पर दिखाई दे रहा है। इससे CBI, NIA जैसी जांच एजेंसियों के साथ-साथ सुरक्षा बलों में भी प्रशिक्षित और अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

