
भारत ने चीन के सिर्फ 1 FDI प्रस्ताव को दी मंजूरी, कीमत मात्र 1 करोड़ रुपये! आखिर इसके पीछे क्या है वजह?
भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में चीन से आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के केवल एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसकी कुल कीमत सिर्फ 1 करोड़ रुपये है। इसके विपरीत, इसी अवधि में हांगकांग से आए 13 FDI प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनका कुल निवेश 610.42 करोड़ रुपये रहा।
इसका सबसे बड़ा कारण भारत की सावधानीपूर्ण FDI नीति है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने Press Note 3 लागू किया था। इसके तहत भारत से स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों (जैसे चीन) से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी निवेश की कड़ी जांच करना था।
हालांकि, मार्च 2026 में सरकार ने कुछ सीमित बदलाव किए हैं। अब इलेक्ट्रॉनिक्स, पूंजीगत सामान और सोलर सेल जैसे चुनिंदा विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों के लिए 60 दिनों के भीतर निर्णय लेने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, कुछ परिस्थितियों में 10% तक चीनी हिस्सेदारी वाले विदेशी निवेशकों को राहत भी दी गई है। इसके बावजूद, चीन में पंजीकृत कंपनियों के लिए सरकारी मंजूरी की शर्त अभी भी लागू है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल 1 करोड़ रुपये के एक प्रस्ताव को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि भारत अभी भी चीनी निवेश को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है। सरकार आर्थिक सहयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए मामले-दर-मामले निवेश प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है।

