
‘भगवा का अपमान है’, पप्पू यादव के संसद में नाटक पर साक्षी महाराज का हमला
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए एक घटनाक्रम को लेकर सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और सांसद साक्षी महाराज ने सांसद पप्पू यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद में किया गया उनका व्यवहार “भगवा का अपमान” है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह का राजनीतिक प्रदर्शन लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
साक्षी महाराज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है, जहां गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि कोई सांसद सदन के भीतर ऐसा आचरण करता है जिससे धार्मिक प्रतीकों या लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा पर सवाल उठते हैं, तो इसकी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “भगवा त्याग, तपस्या और भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। इसका राजनीतिक मंच पर इस तरह इस्तेमाल या अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
दरअसल, संसद में हुए एक विरोध प्रदर्शन को लेकर पप्पू यादव की भूमिका चर्चा का विषय बनी हुई है। विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध सरकार की नीतियों के खिलाफ था, जबकि भाजपा इसे संसद की मर्यादा के विपरीत बता रही है। इसी मुद्दे पर साक्षी महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर राजनीतिक नौटंकी करने का आरोप लगाया।
वहीं, पप्पू यादव और विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना जनप्रतिनिधियों का अधिकार है। उनका तर्क है कि संसद के भीतर उठाए गए मुद्दे जनता से जुड़े हैं और सरकार को उन पर जवाब देना चाहिए। हालांकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि विरोध का तरीका संसदीय नियमों और परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।
इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इसे संसद की गरिमा और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बता रहा है। अब इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।

