1 मेडल से 564 तक का सफर: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की गौरवशाली कहानी, दो बार नहीं खुला था खाता

1 मेडल से 564 तक का सफर: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की गौरवशाली कहानी, दो बार नहीं खुला था खाता

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। शुरुआती वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों को पदक जीतने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। देश ने अपना पहला कॉमनवेल्थ मेडल 1934 में जीता, लेकिन इसके बाद कई वर्षों तक सफलता सीमित रही। आज भारत इस प्रतियोगिता के सबसे सफल देशों में गिना जाता है और उसके नाम कुल 564 पदक दर्ज हैं।

हालांकि भारत के इस सुनहरे सफर में दो ऐसे मौके भी आए, जब खिलाड़ी एक भी पदक नहीं जीत सके। 1930 के पहले कॉमनवेल्थ गेम्स (तत्कालीन ब्रिटिश एम्पायर गेम्स) में भारत ने हिस्सा नहीं लिया था, जबकि 1950 के ऑकलैंड कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल खाली हाथ लौटा। इन निराशाजनक पलों के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार मेहनत की और दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई।

पिछले कुछ संस्करणों में भारत ने निशानेबाजी, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, मुक्केबाजी और टेबल टेनिस जैसे खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है। यही वजह है कि आज भारत कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले देशों की सूची में मजबूती से अपनी जगह बनाए हुए है। 1 मेडल से 564 पदकों तक का यह सफर भारतीय खेलों के विकास और खिलाड़ियों की मेहनत की प्रेरणादायक कहानी बन चुका है।

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