हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस पर एसएफआई ने उठाए पारदर्शिता, जवाबदेही और उच्च शिक्षा सुधार के मुद्दे; मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस पर एसएफआई ने उठाए पारदर्शिता, जवाबदेही और उच्च शिक्षा सुधार के मुद्दे; मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

प्रेस विज्ञप्तिदिनांक: 22 जुलाई, 2026

शिमला /हिमाचल प्रदेश।

राजेश कुमार की रिपोर्ट।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस पर एसएफआई ने उठाए पारदर्शिता, जवाबदेही और उच्च शिक्षा सुधार के मुद्दे; मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने कहा कि विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी अवसर है। विश्वविद्यालय ने पिछले 57 वर्षों में प्रदेश को हजारों विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक, प्रशासक और सामाजिक कार्यकर्ता दिए हैं, इसलिए इसकी गरिमा, विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक चरित्र को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इसी अवसर पर एसएफआई ने विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही, प्रशासनिक सुधार तथा उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार आर्थिक संकट का हवाला देकर विद्यार्थियों पर फीस वृद्धि का बोझ डाल रहा है, जबकि दूसरी ओर सूचना के अधिकार (RTI), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट तथा विश्वविद्यालय के अभिलेख अनेक वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से पहले सार्वजनिक धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

ज्ञापन में निजी एवं सरकारी महाविद्यालयों के निरीक्षण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की गई। एसएफआई ने कहा कि निरीक्षण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो तथा किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या समझौते की संभावना समाप्त की जाए, ताकि विश्वविद्यालय की साख बनी रहे।

एसएफआई ने विभागाध्यक्षों की नियुक्तियों में समान नीति लागू करने की भी मांग उठाई। संगठन ने कहा कि यदि किसी विभाग में सहायक आचार्य को विभागाध्यक्ष का दायित्व दिया जा सकता है तो योग अध्ययन, समाज कार्य, पर्यावरण विज्ञान सहित अन्य विभागों में भी समान सिद्धांत लागू किए जाने चाहिए और प्रशासनिक निर्णय चयनात्मक नहीं होने चाहिए।

ज्ञापन में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 की धारा 2(15) के कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया गया। एसएफआई ने आरोप लगाया कि शिक्षक की परिभाषा से जुड़े मामलों में समानता के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया तथा इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

एसएफआई ने कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग दोहराई। संगठन का कहना है कि यूजीसी विनियम-2010 के प्रावधानों के विपरीत पदोन्नतियां दिए जाने, पूर्व सेवाओं की गणना तथा एरियर भुगतान जैसे मामलों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि यदि किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई हो तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके।

संगठन ने ऐसे मामलों की भी जांच की मांग की जिनमें एक ही एपीआई (Academic Performance Indicator) के आधार पर भर्ती और पदोन्नति दोनों किए जाने तथा बहुत कम समय में सहायक आचार्य से प्रोफेसर तक पदोन्नति होने के प्रश्न सामने आए हैं।

एसएफआई ने वर्ष 2020 के बाद हुई लगभग 186 शिक्षकों की नियुक्तियों पर भी गंभीर प्रश्न उठाए। संगठन ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार कई मामलों में आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, आरक्षण रोस्टर, ओबीसी एवं ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों तथा नेट छूट से जुड़े प्रश्न सामने आए हैं। एसएफआई ने स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा रही, बल्कि इन सभी मामलों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रही है।
दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश में हिमाचल प्रदेश में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को पर हमला किया है उनके अधिकार छीने गए हम साफ़ मांग करते हैं कि हिमाचल में प्रत्यक्ष चुनाव बहाल किये जाए

ज्ञापन में विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों तथा ईआरपी परियोजना में संभावित वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच की मांग की गई। एसएफआई ने कहा कि विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की लागत में भारी वृद्धि तथा ईआरपी प्रणाली पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उसके पूर्ण रूप से लागू न होने के मामले गंभीर चिंता का विषय हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया को लेकर भी परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, जिनकी तकनीकी एवं वित्तीय जांच आवश्यक है।

एसएफआई ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए इन सभी मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए। संगठन ने कहा कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा, विद्यार्थियों के हितों की रक्षा तथा विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने के लिए जवाबदेही तय होना अत्यंत आवश्यक है।

अंत में एसएफआई ने कहा कि वह भविष्य में भी विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक एवं शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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