सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर पूर्व CM केजरीवाल बोले- इतना अहंकार ठीक नहीं है

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर पूर्व CM केजरीवाल बोले- इतना अहंकार ठीक नहीं है

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल ले जाने की कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि “इतना अहंकार ठीक नहीं है” और सरकार को जनता की आवाज़ दबाने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए।

केजरीवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक देश के सम्मानित शिक्षाविद और पर्यावरणविद हैं, जिन्होंने शिक्षा और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे व्यक्ति को विरोध प्रदर्शन के दौरान जबरन हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय विरोध की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है।

दरअसल, सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। चिकित्सकीय सलाह के आधार पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया ताकि उनका इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण किया जा सके। पुलिस के अनुसार यह कदम उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उठाया गया।

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद समर्थकों ने विरोध जताया। कई लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की और बिना सहमति के वांगचुक को वहां से हटाया गया। वहीं, उनके समर्थकों और विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।

इस बीच, अरविंद केजरीवाल ने सोनम वांगचुक के समर्थन में केंद्र सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की। उन्होंने कहा कि असहमति लोकतंत्र की ताकत होती है और सरकार को आलोचना या विरोध से डरने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। केजरीवाल ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों का सम्मान होना चाहिए, न कि उन्हें बलपूर्वक हटाया जाना चाहिए।

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए की गई है।

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