सहारनपुर में मस्जिद विवाद पर जिला कोर्ट का फैसला, मस्जिद पक्ष को बड़ा झटका

सहारनपुर में मस्जिद विवाद पर जिला कोर्ट का फैसला, मस्जिद पक्ष को बड़ा झटका

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में जिला अदालत ने मस्जिद पक्ष को राहत नहीं दी है। जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश को बरकरार रखा।

सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पहले विवादित मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा निर्माण माना था और परिसर खाली करने तथा ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इसके साथ ही 6 करोड़ 41 लाख रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति का आदेश भी दिया गया था। जिला अदालत के फैसले के बाद यह आदेश फिलहाल बरकरार है।

मस्जिद पक्ष ने क्या दलील दी?

सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में याचिका दाखिल की थी। पक्ष की ओर से दलील दी गई कि संबंधित मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और इसलिए इसे वक्फ संपत्ति माना जाना चाहिए। यह भी तर्क दिया गया कि वक्फ संपत्ति से जुड़े मामले की सुनवाई का अधिकार संबंधित वक्फ प्राधिकरण को है।

मस्जिद पक्ष ने सुनवाई के दौरान Places of Worship Act, 1991 का भी हवाला दिया और दावा किया कि धार्मिक स्थल की स्थिति को लेकर इस कानून का संरक्षण लागू होता है। अपने दावे के समर्थन में पुराने दस्तावेज और बिजली बिल समेत कई रिकॉर्ड अदालत में पेश किए गए।

सरकारी पक्ष ने क्या कहा?

सरकारी पक्ष ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड को आधार बनाते हुए कहा कि विवादित जमीन सरकारी संपत्ति है। अदालत के समक्ष जमीन के स्वामित्व और पुराने अभिलेखों से संबंधित दस्तावेज रखे गए। प्रशासन का पक्ष था कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से संबंधित कार्रवाई में वक्फ या पूजा स्थल संबंधी दलीलें मामले को प्रभावित नहीं करतीं।

रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद पक्ष ने इस इमारत के काफी पुराना होने का दावा भी किया, लेकिन अदालत में इस दावे के समर्थन में पर्याप्त ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

17 तारीखों में पूरी हुई सुनवाई

जिला अदालत में मस्जिद पक्ष की याचिका 20 जुलाई 2026 को दाखिल हुई थी। इसके बाद मामले में करीब 17 तारीखों पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों ने अपने दस्तावेज, साक्ष्य और कानूनी दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने के बाद 2 सितंबर को जिला जज ने फैसला सुनाते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को कायम रखा।

अब आगे क्या होगा?

जिला अदालत के फैसले के बाद कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता खुल गया है। हालांकि, मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद ने कहा है कि वह पहले अदालत के आदेश का अध्ययन करेंगे और उसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

इस मामले में फिलहाल अदालत का ताजा फैसला मस्जिद पक्ष के खिलाफ गया है, लेकिन आगे उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना बनी हुई है। इसलिए अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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