
‘यह वही देश, जहां से बाबर आया’, PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर ओवैसी का तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च विदेशी सम्मानों में से एक ‘ओली दराजली दोस्तलिक’ ऑर्डर से सम्मानित किए जाने के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस सम्मान को लेकर बीजेपी और संघ परिवार पर निशाना साधते हुए बाबर का जिक्र किया।
ओवैसी ने रविवार, 30 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी को मिले सम्मान पर तंज कसते हुए कहा कि यह सम्मान उस देश से मिला है, जहां से मुगल बादशाह बाबर भारत आया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बाबर के जन्मस्थान वाले देश ने ही प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया है, तो बीजेपी और संघ परिवार अब विपक्ष पर हमला करते समय बाबर का नाम किस तरह इस्तेमाल करेंगे।
‘बीजेपी को बधाई, बाबर के देश ने PM को सम्मान दिया’
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वह बीजेपी को बधाई देना चाहते हैं, क्योंकि जिस देश से बाबर भारत आया था, उसी देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मानों में से एक से सम्मानित किया है।
ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री जब भी विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उन्हें किसी न किसी तरह का सम्मान मिल जाता है। उन्होंने इसी संदर्भ में बीजेपी की उस राजनीति पर सवाल उठाया जिसमें बाबर का नाम अक्सर राजनीतिक बहसों में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
ओवैसी के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर इतिहास और मौजूदा राजनीति के बीच संबंध को लेकर चर्चा में आ गया है।
‘आप बाबर के नाम पर इतना बुरा-भला कहते थे’
AIMIM प्रमुख ने बीजेपी और संघ परिवार को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे बाबर के नाम पर लगातार आलोचना करते रहे हैं, लेकिन अब उसी क्षेत्र के देश ने प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया है।
ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान सम्मान मिलना अब आम बात हो गई है। उन्होंने इस सम्मान को लेकर बीजेपी पर राजनीतिक कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस देश से बाबर आया था, वहां से मोदी को सम्मान मिलने के बाद बीजेपी के लिए बाबर का नाम लेकर विपक्ष पर हमला करना कितना उचित होगा, यह सवाल खड़ा होता है।
हालांकि, प्रधानमंत्री को दिया गया सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के मौजूदा संबंधों और दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़ा है।
PM मोदी को कौन-सा सम्मान मिला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान ‘ओली दराजली दोस्तलिक’ ऑर्डर से सम्मानित किया गया।
यह उज्बेकिस्तान का महत्वपूर्ण राजकीय सम्मान है, जिसे विदेशी नेताओं को दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी, आपसी सहयोग और दोस्ती को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।
यह सम्मान ऐसे समय मिला है जब भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पीएम मोदी ने सम्मान मिलने पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उज्बेकिस्तान के इस सम्मान के लिए आभार जताया।
उन्होंने कहा कि वह ‘ओली दराजली दोस्तलिक ऑर्डर’ पाकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं और इस सम्मान को भारत तथा उज्बेकिस्तान के मजबूत संबंधों को समर्पित करते हैं।
प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया में दोनों देशों के बीच रिश्तों को प्रमुखता दी गई। उन्होंने सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय भारत-उज्बेकिस्तान की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी से जोड़कर पेश किया।
बाबर का उज्बेकिस्तान से क्या संबंध है?
ओवैसी के बयान में बाबर का जिक्र इसलिए आया क्योंकि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का जन्म फरगना घाटी में हुआ था, जो आज के उज्बेकिस्तान का हिस्सा है।
बाबर ने बाद में भारत की ओर रुख किया और 1526 में पानीपत की लड़ाई में इब्राहिम लोदी को हराने के बाद भारत में मुगल सत्ता की नींव रखी।
यही ऐतिहासिक संदर्भ भारत की राजनीति में समय-समय पर चर्चा का विषय बनता रहा है। बाबर और मुगल इतिहास को लेकर बीजेपी तथा विपक्षी दलों की राजनीति में अलग-अलग नजरिया देखने को मिलता है।
विदेश नीति और घरेलू राजनीति अलग मुद्दे
प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान का सम्मान मिलने को जहां सरकार भारत की विदेश नीति और द्विपक्षीय रिश्तों की उपलब्धि के रूप में देख रही है, वहीं ओवैसी ने इसे घरेलू राजनीतिक बहस से जोड़ दिया है।
दरअसल, किसी विदेशी देश की ओर से दिया गया राजकीय सम्मान आम तौर पर दोनों देशों के बीच संबंधों और संबंधित व्यक्ति के योगदान को ध्यान में रखकर दिया जाता है। वहीं भारतीय राजनीति में नेताओं की विदेश यात्राओं और वहां मिलने वाले सम्मानों को लेकर विपक्ष अक्सर सरकार की विदेश नीति पर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया देता रहा है।
इस मामले में भी सम्मान मिलने के तुरंत बाद इतिहास और मौजूदा राजनीति को जोड़कर बयानबाजी शुरू हो गई है।
इंडोनेशिया भी दे चुका है सर्वोच्च सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी को हाल के समय में कई देशों की ओर से राजकीय और नागरिक सम्मान मिल चुके हैं। जुलाई में इंडोनेशिया ने भी भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल ‘बिंटांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया था।
इस तरह उज्बेकिस्तान का सम्मान भी प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान मिले सम्मानों की कड़ी में जुड़ गया है।
सम्मान पर सियासत तेज
उज्बेकिस्तान के सम्मान ने एक तरफ भारत और मध्य एशिया के बीच बढ़ते रिश्तों को रेखांकित किया है, तो दूसरी तरफ ओवैसी के बयान ने इसे घरेलू राजनीतिक बहस में ला दिया है।
बाबर के ऐतिहासिक संदर्भ को लेकर ओवैसी का तंज अब बीजेपी की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर भी चर्चा पैदा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा इतिहास, विदेश नीति और राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक और बहस का रूप ले सकता है।

