
दिल्ली गैंगरेप केस पर भड़के चंद्रशेखर आजाद, निर्भया कांड का किया जिक्र
दिल्ली-एनसीआर में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले पर नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना की तुलना 2012 के निर्भया कांड के बाद लागू किए गए सुरक्षा उपायों से करते हुए सरकारी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने निर्भया कांड का किया जिक्र
चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर कहा कि मैनपुरी की 16 वर्षीय छात्रा के साथ ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक चलती स्लीपर बस में हुई घटना बेहद गंभीर है। उनके मुताबिक, यह मामला निर्भया कांड के बाद महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों और उनकी निगरानी पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा के लिए नियम और तकनीकी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो घटना के दौरान उनका प्रभावी इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ।
बस की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
सांसद ने लंबी दूरी की यात्री बसों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बसों में निगरानी व्यवस्था, आपातकालीन अलर्ट सिस्टम और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के पालन की जांच की मांग की।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि करीब 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान बस की प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हुई और वाहन में CCTV तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद थीं या नहीं।
ड्राइवर और कंडक्टर पर आरोप
मामले में बस के चालक और परिचालक पर नाबालिग के साथ कथित अपराध का आरोप है। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच जारी है।
घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा के लिए नियम बनाए गए हैं, वहां इतनी गंभीर घटना कैसे हुई।
सुरक्षा नियमों के पालन पर जवाबदेही की मांग
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि केवल नियम बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पालन की नियमित निगरानी भी जरूरी है। उन्होंने चालक और परिचालक के सत्यापन, वाहनों में सुरक्षा उपकरणों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की जांच को लेकर जवाबदेही तय करने की बात कही।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी तो संबंधित अधिकारियों और परिवहन संचालकों की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई।
‘निर्भया कांड के 14 साल बाद भी सवाल’
आजाद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि निर्भया कांड के 14 साल बाद भी अगर बेटियां सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षित नहीं हैं, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने सुरक्षा नियमों को केवल कागजों तक सीमित न रखने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की।
2012 के निर्भया मामले के बाद देश में यौन अपराधों से जुड़े कानूनों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई बड़े बदलाव हुए थे।
जांच के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर की इस घटना की जांच पुलिस कर रही है। मामले में आरोपों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया ने इस घटना को सिर्फ एक आपराधिक मामले के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा तथा नियमों के पालन के मुद्दे के रूप में भी सामने ला दिया है।

