
SS7 नेटवर्क की कमजोरी से खुली लोकेशन की पोल? जानिए कैसे मोबाइल सिग्नल सिस्टम बन सकता है सुरक्षा चुनौती
मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी एक पुरानी तकनीक SS7 (Signaling System No. 7) एक बार फिर चर्चा में आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी नेटवर्क प्रोटोकॉल की कमजोरियों का फायदा उठाकर कुछ हैकर्स और साइबर समूह मोबाइल यूजर्स की लोकेशन जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में टेलीकॉम सुरक्षा को लेकर SS7 को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
SS7 एक ऐसा सिग्नलिंग सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल नेटवर्क के बीच कॉल कनेक्ट करने, मैसेजिंग और रोमिंग जैसी सेवाओं को संचालित करने के लिए किया जाता है। इसे मूल रूप से भरोसेमंद टेलीकॉम नेटवर्क के लिए बनाया गया था, लेकिन समय के साथ इसकी कुछ सुरक्षा खामियां सामने आईं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी हमलावर को नेटवर्क एक्सेस मिल जाए तो वह कुछ मामलों में यूजर की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकता है।
हालांकि, आधुनिक टेलीकॉम कंपनियां SS7 से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए कई सुरक्षा उपाय अपना रही हैं। इसमें नेटवर्क मॉनिटरिंग, अतिरिक्त सुरक्षा लेयर और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने वाली तकनीकें शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल नेटवर्क की सुरक्षा अब पहले से ज्यादा मजबूत है, लेकिन SS7 जैसी पुरानी तकनीकों की निगरानी और अपग्रेड करना लगातार जरूरी बना हुआ है।

