
अंधेरी रातें, किराए का घर, लालटेन की लौ…यहां से शुरुआत, आज विदेशों तक बाजार! मंजू देवी हौसले की मिसाल
किराए का छोटा सा घर, अंधेरी रातें और लालटेन की टिमटिमाती लौ — यही थी मंजू देवी की जिंदगी की शुरुआती तस्वीर. शादी के बाद उन्होंने गरीबी, तंगी और संघर्ष के ऐसे दिन देखे, जिन्हें याद कर आज भी आंखें नम हो जाती हैं. लेकिन कहते हैं न, हुनर अगर सच्चा हो तो हालात ज्यादा देर तक रास्ता नहीं रोक पाते. झारखंड की इस साधारण महिला ने अपनी असाधारण कला से यह बात सच साबित कर दी.
सपनों को टालने से इंकार
मंजू देवी बताती हैं कि घर की हालत ठीक नहीं थी, इसलिए उन्होंने पति का हाथ बंटाने के लिए पार्लर में ब्यूटीशियन का काम किया. दिनभर काम और रात में थकान के बावजूद उनका मन हमेशा कला की ओर भागता था. बचपन से ही उन्हें चित्रकारी का शौक था, पर हालात ने कभी मौका नहीं दिया. फिर एक दिन उन्होंने ठान लिया कि अब सपनों को टालना नहीं है.
मंजू देवी बताती हैं कि घर की हालत ठीक नहीं थी, इसलिए उन्होंने पति का हाथ बंटाने के लिए पार्लर में ब्यूटीशियन का काम किया. दिनभर काम और रात में थकान के बावजूद उनका मन हमेशा कला की ओर भागता था. बचपन से ही उन्हें चित्रकारी का शौक था, पर हालात ने कभी मौका नहीं दिया. फिर एक दिन उन्होंने ठान लिया कि अब सपनों को टालना नहीं है.
आसान नहीं थी शुरुआत
उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर जूट पेंटिंग सीखनी शुरू की. शुरुआत आसान नहीं थी – न पैसे थे, न संसाधन और न ही पहचान. लेकिन सीखने की लगन और मेहनत ने धीरे-धीरे रंग दिखाना शुरू कर दिया. एक साल तक लगातार अभ्यास के बाद उन्होंने जूट से अलग-अलग आर्टिकल बनाना शुरू किया. आज वे खुद जूट का सामान खरीदती हैं और उससे खूबसूरत उत्पाद तैयार करती हैं.बाजार में अलग पहचान
मंजू देवी के बनाए सामान में बॉटल होल्डर, हैंडबैग, लेडीज पर्स, कॉरपोरेट डायरी सेट और कई तरह के होम डेकोर आइटम शामिल हैं. उनकी कला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे झारखंड की पारंपरिक सोहराय पेंटिंग को जूट पर उकेरती हैं, जिससे हर प्रोडक्ट में लोक संस्कृति की झलक दिखाई देती है. यही अनोखापन उनके काम को बाजार में अलग पहचान देता है.
उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर जूट पेंटिंग सीखनी शुरू की. शुरुआत आसान नहीं थी – न पैसे थे, न संसाधन और न ही पहचान. लेकिन सीखने की लगन और मेहनत ने धीरे-धीरे रंग दिखाना शुरू कर दिया. एक साल तक लगातार अभ्यास के बाद उन्होंने जूट से अलग-अलग आर्टिकल बनाना शुरू किया. आज वे खुद जूट का सामान खरीदती हैं और उससे खूबसूरत उत्पाद तैयार करती हैं.बाजार में अलग पहचान
मंजू देवी के बनाए सामान में बॉटल होल्डर, हैंडबैग, लेडीज पर्स, कॉरपोरेट डायरी सेट और कई तरह के होम डेकोर आइटम शामिल हैं. उनकी कला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे झारखंड की पारंपरिक सोहराय पेंटिंग को जूट पर उकेरती हैं, जिससे हर प्रोडक्ट में लोक संस्कृति की झलक दिखाई देती है. यही अनोखापन उनके काम को बाजार में अलग पहचान देता है.
विदेश तक जा रहे उत्पाद
आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. जो मंजू देवी कभी लालटेन की रोशनी में रात गुजारती थीं, उनके बनाए उत्पाद अब विदेशों तक जा रहे हैं. कई कॉरपोरेट ग्राहक उनसे नियमित ऑर्डर देते हैं और उनकी कमाई लाखों में पहुंच चुकी है. मंजू देवी कहती हैं, “अगर हिम्मत न हारें तो कला ही सबसे बड़ा सहारा बन सकती है.” उनकी कहानी न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सपनों की उड़ान के लिए आसमान नहीं, हौसला चाहिए.
आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. जो मंजू देवी कभी लालटेन की रोशनी में रात गुजारती थीं, उनके बनाए उत्पाद अब विदेशों तक जा रहे हैं. कई कॉरपोरेट ग्राहक उनसे नियमित ऑर्डर देते हैं और उनकी कमाई लाखों में पहुंच चुकी है. मंजू देवी कहती हैं, “अगर हिम्मत न हारें तो कला ही सबसे बड़ा सहारा बन सकती है.” उनकी कहानी न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सपनों की उड़ान के लिए आसमान नहीं, हौसला चाहिए.
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