ईरान की पीठ में छुरा घोंप रहा सऊदी अरब? एक तरफ दोस्ती का ढोंग, दूसरी तरफ ट्रंप के साथ मिलकर खेल रहे डबल गेम

ईरान की पीठ में छुरा घोंप रहा सऊदी अरब? एक तरफ दोस्ती का ढोंग, दूसरी तरफ ट्रंप के साथ मिलकर खेल रहे डबल गेम

तेहरान: मिडिल ईस्ट में ईरान को लेकर तनाव जैसे-जैसे बढ़ रहा है, सऊदी अरब की भूमिका अब सवालों के घेरे में आ गई है. एक तरफ सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) खुले तौर पर ईरान की संप्रभुता की बात कर रहे हैं और संभावित सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सऊदी रक्षा मंत्री और प्रिंस खालिद बिन सलमान (KBS) अमेरिका में बिल्कुल अलग संदेश देते नजर आए हैं. MBS और KBS आपस में सगे भाई हैं. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में एक बंद कमरे की बैठक के दौरान सऊदी रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करता, तो ईरानी शासन और मजबूत होकर उभरेगा.

सऊदी के दो चेहरे

यह बयान सऊदी अरब के अब तक के सार्वजनिक रुख से ठीक उलट माना जा रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में सऊदी अरब लगातार यह कहता रहा है कि वह ईरान के साथ तनाव नहीं चाहता. खुद MBS ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत में साफ कहा था कि सऊदी अरब अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा. सऊदी सरकार की ओर से यह भी बयान आया कि वह ईरान की संप्रभुता का सम्मान करती है और कूटनीतिक समाधान चाहती है. लेकिन इसी बीच, सऊदी रक्षा मंत्री का अमेरिका में दिया गया बयान इस नीति पर सवाल खड़े करता है.

क्या ईरान पर हमला करने को कह रहा सऊदी अरब?

रिपोर्ट के मुताबिक, KBS ने अमेरिकी अधिकारियों और थिंक टैंक विशेषज्ञों से कहा कि ट्रंप अगर लगातार धमकी देने के बाद पीछे हटते हैं, तो इससे ईरान को सीधा फायदा होगा. प्रिंस खालिद बिन सलमान अमेरिका में कई अहम बैठकों का हिस्सा थे. उन्होंने विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों से ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर चर्चा की. इन बैठकों का मुख्य मुद्दा यही था कि अमेरिका को अब क्या करना चाहिए. KBS का मानना है कि अमेरिका इस मोड़ पर फैसला नहीं करता तो ईरान इसे अपनी जीत मानेगा. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किसी भी हमले से पूरे इलाके में हालात बिगड़ सकते हैं और उसे संभालना आसान नहीं होगा.जानकारों का मानना है कि सऊदी अरब की यह रणनीति मजबूरी से भी जुड़ी हो सकती है. कुछ हफ्ते पहले तक सऊदी अधिकारी अमेरिका से हमले को टालने की अपील कर रहे थे. लेकिन अब, जब ट्रंप प्रशासन ने खाड़ी में सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, तो सऊदी नेतृत्व शायद यह मान चुका है कि अमेरिका हमला कर सकता है. ऐसे में सऊदी अरब नहीं चाहता कि वह अमेरिका के फैसले के खिलाफ खड़ा दिखे. यही वजह है कि सार्वजनिक मंच पर शांति की बात और बंद दरवाजों के पीछे अलग संदेश देखने को मिल रहा है.

खाड़ी देशों के कई अधिकारी मानते हैं कि यह तनाव एक गंभीर स्थिति है. अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है. लेकिन अगर हमला नहीं होता, तो ईरान खुद को पहले से ज्यादा मजबूत मान सकता है. सऊदी अरब इस पूरे समीकरण में सबसे ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है. वह ईरान से सीधे टकराव से बचना चाहता है, लेकिन साथ ही यह भी नहीं चाहता कि ईरान क्षेत्रीय ताकत के रूप में और मजबूत हो जाए.
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