
चीन की “वन चाइल्ड पॉलिसी”: एक सख्त कानून जिसने चार दशकों तक जन्म दर को नियंत्रित किया
एक समय ऐसा था जब चीन में बच्चे पैदा करना केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक निर्णय नहीं था, बल्कि इसके लिए सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य था। 1979 में तत्कालीन नेता डेंग जियाओपिंग की लीडरशिप में वन चाइल्ड पॉलिसी लागू की गई थी। यह पॉलिसी देश की तेजी से बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने और आर्थिक संसाधनों, नौकरियों तथा आवास पर दबाव कम करने के लिए लाई गई थी।
इस नीति के तहत जोड़े अपने पहले बच्चे के बाद भी नए बच्चे के जन्म के लिए सरकारी अनुमति लेने के लिए बाध्य थे। फैमिली प्लैनिंग विभाग शादियों, गर्भधारण और जन्मों के बीच के अंतर पर कड़ी निगरानी रखता था। कई स्थानों पर अधिकारियों ने महिलाओं के मासिक धर्म चक्र और गर्भनिरोधक के इस्तेमाल तक पर नजर रखी।
जो परिवार नियमों का उल्लंघन करते थे, उन्हें कड़ी सजा का सामना करना पड़ता था। सबसे आम सजा “सोशल मेंटेनेंस फीस” थी, जो परिवार की सालाना आय का 3 से 10 गुना हो सकता था। कई परिवारों को जुर्माना चुकाने के लिए जमीन, घर या कीमती संपत्ति बेचना पड़ता था। इसके अलावा, नियम तोड़ने वाले सरकारी कर्मचारियों को उनकी नौकरी से भी निकाल दिया जाता था।
वन चाइल्ड पॉलिसी का सबसे क्रूर परिणाम उन बच्चों पर पड़ा जो नियमों के उल्लंघन के चलते जन्मे थे। उन्हें चीन के घरेलू रजिस्ट्रेशन सिस्टम से वंचित कर दिया गया, जिसके कारण वे स्कूल नहीं जा सकते थे, स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं ले सकते थे, आधिकारिक पहचान पत्र नहीं बना सकते थे, और बाद में शादी या यात्रा भी नहीं कर सकते थे।
हालांकि अब चीन की जनसांख्यिकीय स्थिति उलट चुकी है। तेजी से घटती आबादी के चलते सरकार ने 2016 में दो बच्चों और 2021 में तीन बच्चों की अनुमति दी। इसी बीच सभी जन्म सीमाओं और जुर्मानों को हटा दिया गया। वर्तमान में चीन प्रति बच्चे लगभग 3,600 युआन की नकद सब्सिडी दे रहा है और वर्कफोर्स की कमी को पूरा करने के लिए रिटायरमेंट की उम्र बढ़ा दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वन चाइल्ड पॉलिसी चीन के सामाजिक ढांचे और जनसंख्या संरचना पर गहरा प्रभाव डाल चुकी है। हालांकि अब सरकार सक्रिय रूप से जनसंख्या बढ़ाने के उपाय अपना रही है, लेकिन चार दशकों तक लागू यह नीति अब भी इतिहास में एक सख्त जनसंख्या नियंत्रण का उदाहरण मानी जाती है।

