यूपी के 75 जिलों में आपातकाल से निपटने की मॉक ड्रिल, अलीगढ़ में ब्लैकआउट; स्कूल में हवाई हमले का अभ्यास

यूपी के 75 जिलों में आपातकाल से निपटने की मॉक ड्रिल, अलीगढ़ में ब्लैकआउट; स्कूल में हवाई हमले का अभ्यास

नागरिक सुरक्षा निदेशालय के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसी क्रम में अलीगढ़ जिले में भी शाम 6:00 बजे ब्लैकआउट किया गया। जैसे ही सायरन बजा, आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी टीमें अलर्ट हो गईं और निर्धारित योजना के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई।

अलीगढ़ के नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज में हवाई हमले की स्थिति को दर्शाते हुए विशेष मॉक ड्रिल कराई गई। अभ्यास के दौरान विद्यालय में मौजूद 500 छात्र-छात्राओं में से 488 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि 12 छात्रों को जानबूझकर “लापता” दिखाया गया, ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन की वास्तविक परिस्थितियों में जांच की जा सके।

रेस्क्यू ऑपरेशन हुआ शुरू
12 लापता छात्र-छात्राओं की तलाश और बचाव के लिए प्रभारी अधिकारी आपदा एवं अपर जिलाधिकारी नगर के नेतृत्व में कई विभागों की संयुक्त टीमें मैदान में उतरीं। इसमें

  • अग्निशमन विभाग

  • सिविल डिफेंस

  • एनडीआरएफ

  • एनसीसी

  • स्वास्थ्य विभाग

की टीमें शामिल रहीं। सभी एजेंसियों ने आपसी तालमेल के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।

ब्लैकआउट के बीच बचाव कार्य
मॉक ड्रिल का उद्देश्य हवाई हमले जैसी आपात स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करना और घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रशासनिक तैयारियों को परखना था। सायरन बजते ही प्रभारी अधिकारी आपदा ने विद्यालय परिसर में तत्काल ब्लैकआउट के आदेश दिए।

विद्यालय के प्रधानाचार्य रविंद्र पाल सिंह तौमर ने प्रशासन को सूचना दी कि 12 छात्र अभी भी परिसर में फंसे हुए हैं। इसके बाद एडीएम सिटी ने तुरंत आपदा राहत टीमों को रेस्क्यू तेज करने और स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए।

रेस्क्यू के दौरान “घायल” छात्रों को एंबुलेंस के माध्यम से तत्काल अस्पताल भेजा गया। इसके साथ ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी मुकेश कुमार के नेतृत्व में अग्निकांड से बचाव की मॉक ड्रिल भी कराई गई और नागरिकों को आपात स्थिति में संयम बरतने व सुरक्षित रहने के उपाय समझाए गए।

कोई हताहत नहीं, सभी ‘घायल’ सुरक्षित
मॉक ड्रिल के समापन पर प्रभारी अधिकारी आपदा किंशुक श्रीवास्तव ने बताया कि इस अभ्यास में किसी प्रकार की कोई मृत्यु नहीं हुई। सभी 12 “घायल” छात्र-छात्राओं को चिकित्सकीय सहायता के लिए भेजा गया। उन्होंने आम नागरिकों को आपात स्थिति में क्या करें और क्या न करें, इस बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस मॉक ड्रिल में कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिनमें

  • उप नियंत्रक नागरिक सुरक्षा एवं नगर मजिस्ट्रेट डॉ. अतुल गुप्ता

  • प्रभारी निरीक्षक नागरिक सुरक्षा सी.पी. सिंह

  • एनडीआरएफ टीम प्रभारी उज्ज्वलकांत पांडेय

  • एनसीसी से मेजर एन.के. सिंह

  • एसई हाइडिल उमेश जैन

  • एसीएमओ डॉ. वी.के. राजपूत, डॉ. अंशु सक्सेना, डॉ. जितेंद्र पाल सिंह

  • विद्यांचल गुप्ता, वर्षा सारस्वत

  • आपदा विशेषज्ञ दीपक मिश्रा और आदित्य कुमार

सहित आपदा राहत टीमों के जवान शामिल रहे।

प्रशासन के अनुसार, यह मॉक ड्रिल आपात स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय को परखने के लिए आयोजित की गई थी, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में जान-माल का नुकसान न्यूनतम किया जा सके।

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