
क्या लोहे का छल्ला कम करता है शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का असर, जानें पहनने के फायदे
ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्याय और अनुशासन का देवता माना जाता है. जब शनि अनुकूल स्थिति में होता है, तो व्यक्ति को मेहनत का फल, स्थिरता और सम्मान मिलता है. लेकिन अगर शनि अशुभ प्रभाव में हों, तो जीवन में संघर्ष, देरी और मानसिक दबाव बढ़ जाता है. ऐसे समय में लोग शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के लिए उपाय खोजते हैं. इनमें लोहे का छल्ला (अंगूठी) पहनना सबसे आम और सरल तरीका माना जाता है. आइए जानते हैं, यह पहनना किनके लिए फायदेमंद है?
लोहे का शनि से संबंध
ज्योतिष के अनुसार हर धातु का किसी न किसी ग्रह से संबंध होता है. लोहे को शनि देव का प्रतीक माना गया है. कहा जाता है कि लोहे का छल्ला पहनने से शनि की ऊर्जा संतुलित होती है. यह नकारात्मक प्रभावों को सोखकर मानसिक और शारीरिक शांति प्रदान करती है.
किसके लिए है फायदेमंद
लोहे का छल्ला हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होती, लेकिन कुछ स्थितियों में यह बेहद उपयोगी साबित होती है.
– साढ़ेसाती और ढैय्या: जिन लोगों का शनि कठिन दौर में है, उनके लिए यह सुरक्षा कवच की तरह काम करती है.
– काम में बाधा: यदि कार्य बिगड़ रहे हैं या लगातार संघर्ष बढ़ रहा है, तो अंगूठी लाभकारी हो सकती है.
– राहु-केतु के प्रभाव: यह अंगूठी राहु और केतु के बुरे प्रभाव को भी कम करने में मदद करती है.
सही उंगली का महत्व
ज्योतिष में लोहे का छल्ला हमेशा मध्यमा उंगली में पहनने की सलाह दी जाती है. इसे पहनने से अंगूठी का संपर्क सीधे शनि पर्वत से होता है. इससे शनि की सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है और जीवन में स्थिरता आती है.
पहनने के लाभ
– नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: यह बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखती है.
– मानसिक एकाग्रता: अनुशासन और फोकस में सुधार करता है.
– दुर्घटनाओं से सुरक्षा: आकस्मिक घटनाओं से बचाव का आभास मिलता है.
– सकारात्मक सोच: व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है.
– पहनने से पहले ध्यान देने योग्य बातें
– घोड़े की नाल का लोहा: ज्योतिष में इसे सबसे शुभ माना गया है.
– शनिवार का दिन: सूर्यास्त के बाद पहनना शुभ माना जाता है.
अंगूठी को शुद्ध रखने के लिए उसे कच्चे दूध या गंगाजल से साफ करना जरूरी होता है। ऐसा करने से अंगूठी की पवित्रता बनी रहती है और नकारात्मकता दूर मानी जाती है।

